आजाद भारत के लिए 4 अप्रैल 2021 एक ऐतिहासिक अवसर होगा जब व्याकुल हो चुके देश भर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और इनके परिजन दिल्ली में महात्मा गांधी के समाधि स्थल राजघाट पर प्रात 9:00 बजे एकत्रित होंगे 10:00 बजे से 4:00 बजे तक जंतर मंतर पर सांकेतिक धरना प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा अस्तित्व रक्षा यात्रा के नाम में सम्मिलित होने के संबंध में देशभर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों व परिजनों को पत्र संदेश भेजा गया|
उस पीड़ा व अपील को आम आदमी व नेतृत्व कर्ताओं की जानकारी में लाने इसे एक विज्ञप्ति के रूप में समाचार पत्र में प्रकाशन हेतु प्रदेश स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के सचिव बसंत कश्यप ने उपलब्ध कराया है और कहा है कि कोरोना से बचाव के उपायों को ध्यान में रखे।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा उत्तराधिकारियों की ४ अप्रैल को दिल्ली में “अस्तित्व रक्षा यात्रा”-
भारत माता के सम्मान की रक्षा के लिए महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साथ आज ही साबरमती आश्रम से दांडी यात्रा आरंभ की थी, देश के सभी स्वतंत्रता सेनानी संगठन अपने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सम्मान तथा अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए ४ अप्रैल २०२१ रविवार को बापू की समाधि राजघाट में नमन करने के बाद जंतर-मंतर से राष्ट्रपति भवन तक “अस्तित्व रक्षा यात्रा” निकालेंगे।
जैसा कि सभी जानते हैं कि भारतीय संविधान के अनुसार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा उनके परिवारों के संरक्षक महामहिम राष्ट्रपति महोदय हैं। कहने के लिए तो हर महत्वपूर्ण अवसरों पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शब्द का उच्चारण करके सम्मान का भाव प्रदर्शित किया जाता है, आज भी माननीय प्रधानमंत्री जी का साबरमती से दिया गया उद्बोधन सुना, लगा कि कुछ सेनानी परिवारों के बारे में भी कुछ बोलेंगे, पर वही ढाक के तीन पात। अन्य समारोहों में भी मंत्री तथा राजनेता दांडी यात्रा की रस्म अदायगी करते रहे, पर व्यवहार में देखा गया है कि न तो केन्द्र सरकार और न ही राज्य सरकारें आजादी के ७४ वर्ष तक स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को वह सम्मान दे पाईं, जिसके वे हकदार हैं। स्थानीय प्रशासन तो और भी एक कदम आगे है।
जिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग बलिदान से आज सभी खुली हवा में सांस ले रहे हैं, हर तरह की सुख सुविधाओं का उपभोग कर रहे हैं, उनके नाम से देश की राजधानी दिल्ली में “राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक” भी सरकार नहीं बना पाई, न सेनानी परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए किसी आयोग का गठन कर पाई और न ही स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के बच्चों को केन्द्रीय विद्यालयों में प्रवेश की व्यवस्था कर पाई। ये सेनानी यदि अपने परिवारों की परवाह करते, उनके पालन पोषण में लगे रहते, तो आज हम आजादी का अमृत महोत्सव नहीं मना पाते, पर जब अपने पूर्वज स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की अनुपस्थिति में सबसे अधिक कष्ट झेलने वाले यही परिवार सरकार के पास अपनी पीड़ा सुनाने पहुंचते हैं तो उन्हें कहा जाता है कि आप अपने पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम का नाजायज फायदा उठाना चाहते हैं। यह सुनकर सीना छलनी हो जाता है। हमारे पूर्वजों ने यह नहीं सोचा था कि हम जिस देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर रहे हैं, उसकी बागडोर जिनके हाथों में जाएगी, वे हमारे वंशजों का इस तरह अपमान करेंगे।
कुछ दिन पहले ही आजादी का अमृत महोत्सव मनाने के लिए प्रधानमंत्री सहित २५० व्यक्तियों की एक कमेटी का गठन सरकार ने किया, इस कमेटी में फिल्म, खेल, संगीत से लेकर राजनेताओं तक को तो स्थान दिया गया, पर न तो इसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की सरकार द्वारा ही बनाई गई परामर्शदाता कमेटी के सदस्यों को स्थान नहीं दिया गया और न ही किसी स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठनों को। यह एक तरह से स्वतंत्रता सेनानी परिवारों का घोर अपमान है। जिनके खून पसीने से आजादी मिली, उन्हीं का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है और उन्हें तथा उनके उत्तराधिकारी परिवारों को अपमानित किया जा रहा है, यह कैसी विडम्बना है?
शायद यह हमारे सेनानी संगठनों के बिखराव का प्रतिफल है। हम अपने एक लाख तेहत्तर हजार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों की शक्ति का एहसास सरकारों को कराने से चूक गए हैं। आज उनके वंशजों की संख्या करोड़ों में है। हमारी संयुक्त शक्ति यदि अंगड़ाई भी ले ले, तो सरकारों की इस तरह अपमानित करने की हिम्मत ना होगी। अब भी समय है, अपनी शक्ति को पहचानें। हम भी अमृत महोत्सव मनायेंगे, पर अपने पूर्वजों को सम्मान तथा अपने अस्तित्व की रक्षा का सरकार द्वारा सुनिश्चित आश्वासन मिलने के बाद।
इसी आशय से ४ अप्रैल को देश भर में सेनानी परिवारों के हितों की रक्षा के लिए संघर्षरत सभी सेनानी संगठनों की ओर से जंतर-मंतर से राष्ट्रपति भवन तक की “अस्तित्व रक्षा यात्रा” के माध्यम से अपने संरक्षक महामहिम राष्ट्रपति महोदय से गुहार लगायेंगे और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा अपनी पीड़ा का ज्ञापन सौंपेंगे। ज्ञापन तैयार करने के लिए हमने सभी संगठनों के प्रमुखों से विचार-विमर्श करके लिखित में हमारे पास भेजने के लिए कहा है, ताकि संयुक्त ज्ञापन तैयार कर सकें।
इस “अस्तित्व रक्षा यात्रा” में सभी रजिस्टर्ड सेनानी संगठनों को आमंत्रित किया गया है, यह ऐतिहासिक कार्यक्रम किसी एक संगठन का नहीं है, जो भी संगठन अपना विवरण देंगे, वे सभी सहयोगी संगठनों के रूप में स्थान पाएंगे। हर प्रान्त के संगठनों से अनुरोध करते हैं कि हर जिले से दिल्ली “अस्तित्व रक्षा यात्रा” में पहुंचने वाले उत्तराधिकारियों की सूची उत्तराधिकारी का नाम, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का नाम, पूरा पता तथा मोबाइल नंबर यथाशीघ्र हमारे वाट्सप 9720943838 पर भेजने का कष्ट करें।
इस “अस्तित्व रक्षा यात्रा” में सभी को अपने अपने खर्च से ४ अप्रैल को प्रात:काल ९ बजे तक बापू की समाधि राजघाट पहुंचना है, वहां से १० बजे जंतर-मंतर पहुंचेंगे। १० बजे से ४ बजे तक जंतर-मंतर पर सांकेतिक धरना प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति भवन तक “अस्तित्व रक्षा यात्रा” की जाएगी और महामहिम राष्ट्रपति तथा माननीय प्रधानमंत्री जी को ज्ञापन सौंपने के बाद अपने अपने घर के लिए प्रस्थान करेंगे। इस “अस्तित्व रक्षा यात्रा” में पूर्व सैनिकों ने भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है।
आज भी जो सेनानी दांडी यात्रा में शामिल नहीं हो पाए, उन्हें पछतावा हो रहा है, काश! हम भी दांडी यात्रा में शामिल होते। कहीं हमसे भी वह गलती न हो जाए। हर जिले में हर उत्तराधिकारी तक यह सूचना भेजने का प्रयास करना चाहिए, ताकि कोई यह न कह सके कि ऐतिहासिक “अस्तित्व रक्षा यात्रा” में शामिल होने से हम चूक गए।
-जितेन्द्र रघुवंशी
