? ब्यूरो रिपोर्ट विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद
मैनपुर। ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम डुमाघाट में करोड़ो के विभागीय कार्यो में भ्रष्टाचार की गाथा लिख चुका भूमिसरंक्षण विभाग,अब मनरेगा जैसे अधिनियम की भी धज्जियां उड़ा रहेे है।क्योकि भूमि सरंक्षण विभाग के एसडीओ ही मैनपुर जनपद के प्रभार में है।
मैनपुर विकास खण्ड में विगत 10 वर्षों से भूमि सरंक्षण विभाग द्वारा 30 करोड़ से भी ज्यादा खर्च कर स्टॉप डेम, चेक डेम , सिंचाई तालाब निर्माण कराया गया था,इनमें से एक भी योजना भले ही सिंचाई सुविधा देने में नाकाम रहा पर ओवर स्टीमेट व भरस्टाचार से अफसर लाल जरूर हो गए है।यही वजह है कि लगातार विभाग का काम आगे भी जारी रहा।डुमाघाट पँचायत के सीएलबाहरा नाला में इस बार यह विभाग मनरेगा योजना के साथ मिलकर 84 लाख लागत से 5 चेक डेम का निर्माण करवा रही है।2 कार्य 21-21 लाख के है,वंही 3 चेकडेम 14,14 लाख लागत के बन रहे है।हमने जब मौके का मूयाना किया तो देखा की विभाग मनरेगा अधिनियम की धज्जिया उड़ा रहा है।मनरेगा के लिए नियुक्त सभी तकनीशियन को इस काम से दूर रखा गया है।न कार्य स्थल पर बोर्ड, न ही मानक स्तर के सामग्री का इस्तेमाल होते दिख रहा है।काम की देख रेख के नाम विभाग ने गैर तकनीकी जानकार सर्वेयर को जिम्मेदारी दी गई है।हमने जब इनसे दरकिनार किये जा रहे नियमो की वजह जानने की कोशिश किया तो कर्मी भाग खड़े हुए।

भूमि सरंक्षण विभाग के कार्यो के खिलाफ आदिवासी कांग्रेस मोर्चा खोल कृषि मंत्री तक मामला पहूंचाया गया है।अब भाजपा भी विभाग द्वारा मनरेगा के कार्यो में गड़बड़ी को लेकर लामबद्ध हो रहा है।भाजपा ने आरोप लगाया है कि भूमिसरक्षण विभाग के एसडीओ ही जनपद सीईओ के प्रभार में होने के कारण ही अब मनरेगा के कार्यो में भरस्टाचार किया जा रहा है।मामले की शिकायत कलेक्टर से करने के बाद कार्यवाही नही हुई तो,भाजपा अब सड़क की लड़ाई लड़ने का मूड भी बना लिया है।
