लाखो के गबन में और नए खुलासे मामला उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व का

लोकेश्वर सिन्हा
गरियाबद। जिले में उदन्ती सीता नदी टाइगर रिजर्व कार्यालय में चेक में फर्जी हस्ताक्षर कर सरकारी खजाने में सेंध लगाने के मामले में कई नए नए चौकाने वाले खुलासे हो रहे है। जिसमे यहा पदस्थ बड़े अफसर तक कि कार्य शैली सन्देह के दायरे में है। मसलन दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों पर इनकी कृपा दृष्टि का आलम यह है कि यंहा इनको सरकारी घर तक एलाट की गया है। जिसे रेगुलर कर्मचारी को मिलना मुश्किल है। फर्जी चेक के मामले में एक नई व रोचक जानकारी सामने आई कि उप निदेशक उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व के करंट खाता क्रमांक 33735076991 में सारे चोरों ने मिलकर छह लाख तीस हजार के लगभग राशि जमा पर्ची से जमा कर आए ताकि गबन के मामले को दबाया जा सके किन्तु पहले इस मामले में गबन तो गबन है उल्टा सुबूत मिटाने और गुमराह करने का मामला भी बनता है। साथ ही इस मामले में डरा धमका कर एक आरोपी से शपथ पत्र तक बनवा लिया गया। इस सरकारी खाते से फर्जी हस्ताक्षर कर चेक भुनाने के मामले में बैक से उनका पक्ष व जानकारी लिए जाने पर उन्होंने बताया की 38 फर्जी चेक आये है जिसमे यह 17 अलग अलग खाते में आरटीजीएस के जरिये भुगतान किए गए है। इन खातों के संचालको की जांच की जाय तो कई तथ्य उजागर होंगे । 

आखिर कौन कौन है शामिल

इस कांड में दो दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी सहित एक स्थनीय रेगुलर कर्मचारी व रायपुर के कर्मचारी के हाथ होने की जानकारी प्राप्त हो रही है। हालांकि सभी ने मिल कर वन विभाग में कार्यरत कर्मचारी के पुत्र जो दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत है उसके कंधे पर मढ़ने के लिए शपथ पत्र, रुपये जमा कराने का षड्यंत्र किया गया है। जिसको लेकर प्रश्न उठना स्वाभाविक है । 

पहले भी कर चुके ऐसे कारनामे
गत वर्ष विभागीय कर्मचारी के मेडिकल सम्बधी दस्तावेजो के साथ छेड़छाड़ व कूटरचना कर रुपये निकालने का मामला इसी विभाग के कर्मचारियों ने अंजाम दिया गया था। जिसमें दोषी सिद्ध होने के बाद भी लिए अब तक किसी भी कर्मचारी के ऊपर कार्यवाही अब तक नही होने के चलते ही कर्मचारियों के हौसले बुलंद है। जो कि फर्जी कार्य करने से भी नही चूक रहे है। इनमें से एक कर्मचारी की संलिप्तता उस समय भी पाई जाकर उसके खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए थे। जो स्थानीय अफसर द्वारा आदेश की अवहेलना का ही नतीजा है साथ ही विभाग के अफसर की भी भूमिका सन्देह के दायरे में है? जिसके चलते शासन प्रशासन की छबि धूमिल हो रही है। 

वही नियम क्या कहता हैं दैनिक वेतन भोगियो को लेकर

दैनिक वेतन भोगियो को लेकर सरकारी कार्य कराने के निर्देशों की भी यंहा खुलकर धज्जियां उड़ाई जा रही थी।

सामान्य प्रशासन विभाग छत्तीसगढ़ शासन मंत्रालय महानदी भवन, नया रायपुर पत्र कमांक एफ 9-8 / 2017 / 1-5 नया रायपुर, दिनांक 7/02/2017 द्वारा समस्त संभागायुक्त, छत्तीसगढ़ समस्त कलेक्टर छत्तीसगढ़ विषय शासकीय कार्यालयों में अनाधिकृत व्यक्तियों का हस्तक्षेप के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा गंभीरता से लेते हुए संज्ञान में लिया गया है।  किसी भी शासकीय कार्यालयों में गैर शासकीय व्यक्तियों से शासकीय कार्य नहीं होना चाहिए। इससे न केवल प्रशासन की व्यवस्था प्रभावित होती है बल्कि आम जनता की नजरों में प्रशासन के प्रति विश्वसनीयता घटती है। इससे शासकीय अभिलेखों में छेड़छाड़ की आशंका भी बनी रहती है।अतः आपको कड़े निर्देश दिये जाते हैं कि अपने अधीनस्थ तहसील/विकास खंड कार्यालयों में स्वयं निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि शासकीय कार्यालयों में बाहरी व्यक्तियों से शासकीय कार्य का संचालन न हो। यदि ऐसा करते हुए कोई अधिकारी/कर्मचारी दोषी पाये जाते है तो उनके विरूद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाने के निर्देश दिए गए है।
अब हमें देखना होगा कि उक्त विभाग अब आगे क्या कार्यवाही करेंगे कि बस……

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