तरीघाट में श्री मद भागवत कथा,,मन को भगवान में अर्पण करना ही सच्ची बलि है,,कृष्णकुमार


पाटन—श्री मद भागवत कथा के तीसरे दिवस भगवताचार्य कृष्णकुमार तिवारी ने जड़ भरत प्रसंग पर आए कथा में बलि प्रथा पर कहा कि वास्तव में बलि वह है जो अपने मन को भगवान में अर्पण कर उसमें तल्लीन हो जाये यही वास्तविक बलि है ,,भरत को लोग अज्ञानता के वश में जड़ कहते थे वे परमज्ञानी थे ,भगवताचार्य ने कहा कि मिथ्या अहंकार नही पालना चाहिए इस संसार मे सब यही छोड़ कर जाना है मुक्ति प्राप्त करने के लिये केवल जाने का रास्ता है वापसी का नही है जो वास्तव में मोक्ष है उन्होंने कहा कि कलयुग में समय की महत्ता है श्री तिवारी ने उम्र बढ़ने के बात केवल भ्रान्ति है उम्र बढ़ नही रही कम हो रही है समय के कि समय ऐसे चक्र है जो सब के उम्र को काट रहा है अपने आयु पर भरोसा नही करना इसलिये भगवत भक्ति में समय को लगाना चाहिए मालिक के दरबार मे सब लोगों का हिसाब है अच्छे कर्म करो समय गुजरते जाता भगवान का नाम जपते जाओ वैतरणी पार हो जाएगा, श्री तिवारी इस बात पर अजामिल ब्राम्हण की कथा सुनाई कथा वाचक ने बताया कि गणिका से विवाह कर विभिन्न प्रकार से बहुत पाप करने लगा एक दिन एक साधु महाराज ने अजामिल के पाप कर्म को देखकर उसके नैवे सन्तान का नाम नारायण रखने कहा साधु के कहने से बालक का नाम नारायण रख लिया पिता अब हर बात में पुत्र के नाम से भगवान का नाम जपने लगा जब मृत्यु के समीप आने पर अपने पुत्र का नाम नारायण को पुकारने लगा अंतिम समय मे भगवान का नाम लेने से अजामिल मोक्ष को प्राप्त हुआ श्री तिवारी ने कहा कि कलयुग में भजन कीर्तन के माध्यम से भगवान का नाम प्रभावशील है प्रजापति दक्ष के श्राप के कारण देवर्षि नारद किसी जगह पर गौ दोहन में जितना समय लगता है उतने समय ही किसी जगह पर रुक पाते है
आज के कथा में जनपद अध्यक्ष राम बाई सिन्हा,जीवन लाल,महेंद्र कुमार, तोरण लाल सिन्हा जनपद सदस्य मीरा बाई सिन्हा,दीपक साहू,उर्मिला,सरिता,संगीता के अलावा ग्राम वासी उपस्थित थे

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