दुर्ग:निजी स्कूलों की मनमानी के विरोध में पालकों ने कलेक्ट्रेट का किया घेराव…बुधवार को मुख्यमंत्री निवास का करेंगे घेराव

दुर्ग। छत्तीसगढ़ छात्र पालक संघ द्वारा शुक्रवार को मानस भवन दुर्ग से रैली की शक्ल में जिला कलेक्ट्रेड दुर्ग पहुंचे। प्रदर्शन कारी पालक जैसे ही कलेक्टरेट घेराव करने पहुंचे उन्हें गेट के पास पहुंचे उन्हें बाहर ही रोक दिया गया। गेट के पास रोके जाने पर पालक बच्चों के साथ गेट के बाहर ही बैठकर स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों को फीस के नाम पर लगातार प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए शिक्षा मंत्री, जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ जमकर नारे बाजी की।
पालकों का कहना है कि कोरोना काल मे प्रशासन के आदेश पर पालकों द्वारा अपने सभी प्रतिष्ठानों को बंद रखा गया। सभी लोग अपने आप को घरों मर कैद कर रखे थे। जिससे लोगो को हजारों/लाखों का नुकसान हुआ है।कई महीने आर्थिक नुकसान सहने के बाद भी किसी भी पालक द्वारा जिला प्रशासन या राज्य प्रशासन से मुवावजे की मांग नही की गई। और ना ही भरपाई करने के लिये किसी तरह का विरोध प्रदर्शन किया गया।

लेकिन उसके बाद भी निजी स्कूलों द्वारा उच्च न्यायालय के ट्यूशन फीस लेने की आड़ में आर्थिक मार झेल रहे पालकों से पूरी फीस लेने की दबाव स्कूल प्रबंधन द्वारा किया जा रहा है। बच्चो की ऑनलाइन शिक्षा के लिये मोबाइल खरीदने को बाध्य किया गया और हर महीने मोबाइल रिचार्च के नाम पर 500 रुपये अतिरिक्त भार वहन करना पड़ रहा है। स्कूल द्वारा फीस की मनमानी की शिकायत कई बार करने के बाद भी इस विषय पर कोई पहल नही किया गया।
लगभग डेढ़ घंटे तक पालकों द्वारा जमकर नारे बाजी की गई। पालक गेट पर ही कलेक्टर को बुलाने की मांग पर अड़े थे। जिसके बाद पालकों की प्रतिनिधि मंडल को बुलाकर कलेक्टर ने पालकों से बात किये। पालकों ने पूर्व में दिए सभी आवेदनों पर कार्यवाही करते हुए सभी स्कूलों में 30 प्रतिशत ट्यूशन फीस लेने के लिये आदेश दिए जाने की मांग को लेकर जिलाधीश को आवेदन दिया। जिला कलेक्टर ने पालकों के प्रतिनिधि मंडल से एक सप्ताह के भीतर निराकरण करने की बात कही। छात्र पालक संघ के प्रदेश अध्यक्ष नजरूल खान ने कहा कि अब पालक अपनी मांग को लेकर 3 फरवरी बुधवार को मुख्यमंत्री निवास की घेराव करने की तैयारी में है।

देखिये वीडियो…..


गौरतलब हो कि पालक संघ द्वारा जिले के 16 निजी स्कूलों की विभागीय आडिट की मांग जिला शिक्षा अधिकारी से की गई थी। लेकिन लगभग 4 महीने बाद भी जांच रिपोर्ट नही मिल पाई है। जिसके कारण पालकों में काफी आक्रोश है।
1.पालकों ने मांग किया कि लॉक डाऊन के दौरान बंद शिक्षण संस्थानो को पालक कोई फीस नही देंगे।
2.स्कूलों में शुरू हुई ऑनलाइन कक्षाएं जिनकी समयावधि सामान्य दिनों में लगने वाले समय से बहुत कम रही और किसी भी छात्र ने स्कूल की किसी भी सुविधा का।लाभ नही उठाया इसलिये पूरी फीस ना देकर 30 प्रतिशत ट्यूशन फीस लिया जाए।
3.निजी प्रकाशन की पुस्तकें मान्य नही होगी। सिर्फ एनसीआरटी प्रकाशन की पुस्तकें ही स्कूलों में लागू किया जाए।

  1. स्कूलों में पालकों और शिक्षकों का शोषण होता है इसलिये पालक समिति के सदस्यों का चयन करने का अधिकार उस स्कूल के पालक को ही दिया जाय।
  2. शिक्षा के अधिकार अधिनियम की कढ़ाई से पालन करवाने हेतु जिला शिक्षा अधिकारी को आदेशित किया जाए।
  3. 3 महीने पहले जिन 16 स्कूलों की विभागीय आडिट कर जांच की मांग की गई थी उन स्कूलों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर कार्यवाही किया जाए।
  4. अगले सत्र की फीस नो लास नो प्रॉफिट के सिद्धांत के अनुरूप ही तय की जाय।
  5. स्कूल ड्रेस में मोनो की बाध्यता को समाप्त कर ड्रेस के नाम पर हो रही लूट को समाप्त किया जाए।
  6. स्कूल बसो की दर दूरी के हिसाब से किया जाय।
  7. .स्कूल के शिक्षकों द्वारा बच्चों की पढ़ाई में योगदान दिया है। इसलिये 30 प्रतिशत फीस दी ताकि शिक्षकों को वेतन स्कूलों द्वारा दिया जा सके।

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