? जिला रिपोर्टर कृष्ण कांत त्रिपाठी गरियाबंद
गरियाबंद। जीवन में कुछ करने की तमन्ना हो तो दिव्यांगता या शारीरिक दुर्बलता आड़े नहीं आती। बस मन में उत्साह के साथ ही लगन होना जरूरी है। इस बात को चरितार्थ कर रहे हैं खुटेरी के बेंजो वादक इतवारी यादव। नगर में रामायण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बैंजो पर तान छेड़कर लोगों का दिल जीत लिया। उम्र के 35 वां बसंत देख चुके इतवारी ना सिर्फ बैंजो पर अपनी उंगलियों के कमाल दिखाते हैं बल्कि विगत 22 वर्षों से हारमोनियम पर संगत भी कर रहे हैं साथ ही छत्तीसगढ़ी गीतों पर शानदार आवाज देते हैं। जहां भी मंच पर प्रस्तुति देते हैं लोग इनके कला के मुरीद हो जाते हैं। वह 80% दिव्यांग है पैरों से चल नहीं पाते है इसलिए ट्राईसिकल से आना-जाना करते हैं तथा बैसाखी का भी सहारा लेते हैं। इन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है
इसके बाद शासकीय नौकरी के लिए अनेक आवेदन दिए पर आज तक कोई काम नहीं मिला। तब इन्होंने स्कूल में पढ़ाना ज्यादा अच्छा समझा और जनभागीदारी समिति के द्वारा पिछले 15 वर्षों से अध्यापन का कार्य कर रहे थे। पिछले वर्ष कोरोनावायरस कारण स्कूल बंद होने से इनका अध्यापन टोटल बंद हो गया। उससे मिली राशि से अपने परिवार का पालन पोषण करते थे लेकिन स्कूल बंद होने के बाद जीवन यापन की समस्या आन पड़ी पश्चात टेलर का काम कर रहे हैं। उस राशि से दिनचर्या चल रही है। हौसला बुलंद है और उनका कहना है कि बेंजो वादन के जरिए अपने गांव सहित पूरे प्रदेश का नाम रोशन करना चाहता हूं। आज भी प्रतिदिन बैंजो पर अपनी उंगली अवश्य फेरते हैं। उन्होंने बताया कि 2000 से अधिक मंचों में अभी तक प्रस्तुति दी है। मानस मंच, पंडवानी, नाचा के कलाकार है। इन्होंने अपने रिस्क से जय मां सतधारा संगम छत्तीसगढ़ी नाच पार्टी का भी संचालन किया। लगातार पांच वर्षों तक यह नाचा पार्टी लोगों की जुबां पर रही परंतु किन्ही कारणवश उसे बंद करना पड़ा।
रामायण मंच पर वर्तमान में इनकी कलाकारी दिखती है। बैंजो पर वायलिन चलाते हैं तो आवाज की सुमधुर जादू बिखर जाती है और लोग एकबारगी उस आवाज को सुनने के लिए एकत्रित हो जाते हैं। इनके कला से प्रभावित होकर धमतरी जिला में इन्हें कला एवं शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित भी किया। उन्होंने बताया कि जीवन में कुछ करने की लालसा हो और मेहनत उस हिसाब से किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है। बेंजो के जरिए वह ना सिर्फ अपने गांव बल्कि प्रदेश का नाम बड़े मंचों में प्रस्तुति के साथ रोशन करना चाहते हैं। इतवारी यादव ने छत्तीसगढ़ प्रदेश के संस्कृति विभाग से कलाकारों को आर्थिक सहयोग देने की मांग की है कम से कम जो कलाकार दिव्यांग है उनके जीवन यापन पर सरकार को प्रोत्साहन राशि मिलनी चाहिए। श्री यादव ने बताया कि जीवन संघर्ष है और जीने का नाम है। हार मानने से सब कुछ समाप्त हो जाता है जीतने की ललक इंसान को आगे बढ़ाती है। मेरी मेहनत में निरंतरता है और सफलता जरूर मिलेगी
