पर्यावरण हितवा संगवारी रोमशंकर यादव की नववर्ष पर स्वरचित कविता


नहीं किसी के तन पर चिथड़े हो
नसीब हर तन को जरूरी कपड़ें हो
हर मुंह को मिले पर्याप्त निवाला
ऐसी किस्मत दे सबको ऊपरवाला
हो सभी के लिए न्याय,हक व सम्मान
खुशहाल हो सभी मजदूर व किसान
खुले आसमान के नीचे रहे न किसी गरीब का बसेरा
मिले सबको मकान तभी सचमुच आएगा नया सवेरा
धर्म, जाति, सम्प्रदाय के नाम
न रहे किसी को किसी से बैर
हर जुबान पर हो दुआएं
रहे सभी की खैर
नहीं किसी की कोई अस्मत लुटे
नहीं किसी घर की किस्मत फूटे
जीव जन्तुओं पर भी प्यार हो
धरती का हराभरा श्रृंगार हो
इसी संकल्प के साथ मनाए नया साल
तो सभी लोग हो जाएंगे खुशहाल
तब धरती अम्बर चहु ओर रोम रोम गूंजेगा स्वर
मुबारक नया साल
मुबारक नया साल
—रोमशंकर यादव
?आपके जीवन में खुशियां ही खुशियां हो इन्हीं शुभकामनाओ सहित-रोमशंकर, कविता, हिमशिखा?
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