विभागीय गंभीर लापरवाही के चलते वन विभाग के आवासीय मकान वर्षों से अधूरा… शासकीय राशि का खुलेआम दुरुपयोग

? रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद
 

 मैनपुर। “वैसे तो हजारों गरीब, मजदूरों को रहने के लिए झोपड़ी तक के भी नसीब नहीं होती। खुले आसमान में जिंदगी कट जाती है। उन लोगों को झोपड़ी नहीं रहने का दर्द जीवन भर सताए जाती है। गरीबी के चलते जीवन भर बिना आशियाना के यूं ही जिंदगी कट जाती है। वही लाखों करोड़ों का बजट देकर  सरकार वन विभाग के जिम्मेदारों के लिए आवासीय मकान निर्माण के लिए राशि दिया जाता है। मगर वन विभाग के द्वारा शासकीय राशियों का खुलेआम दुरुपयोग करते हुए आवासीय मकान को आधा अधूरा छोड़ दिए जाने से आवासीय भवन जर्जर होने के कगार पर पहुंच गया है। इसका जिम्मेदार कौन होगा। यह बताना नामुमकिन है।”

 मैनपुर,,, विकासखंड मुख्यालयफ मैनपुर से 22 किलोमीटर की दूरी पर बसा ग्राम तौरेंगा में वन विभाग तौरेंगा परिक्षेत्र के द्वारा निर्मित आवासीय मकान अधर में पड़े गोते खा रहा है।वन विभाग द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बता दें,कि ग्राम तौरेंगा में वन विभाग के अधिकारियों ,कर्मचारियों के आवासीय मकान पिछले 7-8 वर्षों से जिम्मेदारों के द्वारा अधूरा बना कर छोड़ दिया गया है। आवासीय भवन के पूर्ण नहीं होने से भवनों की रखरखाव व देखरेख नही होने के कारण भवन जर्जर होकर खंडहर में तब्दील हो चुका हैं। अधूरा भवन निर्माण को पूर्ण कराने के दिशा में वन विभाग के  वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा आज तक पहल नहीं किया संदेहास्पद लगता है।
आवासीय भवन खंडहर। दुर्घटना होने का कर रहा इंतजार
वन परिक्षेत्र तौरेंगा के वन परिसर तौरेंगा में विगत 8 वर्ष पहले पुराने कच्चे सरकारी भवनों को ढहा करके पक्के नए भवनों का निर्माण कराई गई थी।लेकिन विभाग की लापरवाही और समयसीमा मे भवनों को पूर्ण निर्माण नहीं होने से इन दिनों लाखों रुपयों का शासकीय भवन बदहाल अवस्था में है। अधूरा भवनों की छत से पानी टपकता है। दरवाजे और खिड़कियां सड़ने लगी है। गांव के बीच में होने के कारण आसपास छोटे-छोटे बच्चे खेलते रहते हैं। भवन के अंदर मवेशियों का डेरा भी रहता है। जिससे कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में बरसों से अधूरा पड़े लाखों रुपए की भवनों को पूर्ण निर्माण कराने की नितांत आवश्यक है।

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