गरियाबंद जिले में नियम विरुद्ध बनाये गए संकुल समन्वयक ,,,जिला युंका उपाध्यक्ष हरीश यादव ने कलेक्टर को पत्र भेज नियमानुसार नियुक्ति की मांग किया,,,

छुरा।विगतकई वर्षों से गरियाबंद जिले में नियमों को ताक मे रखकर बनाया गया है संकुल स,मन्वयक,,जिले के छुरा,फिंगेश्वर,गरियाबंद,मैनपुर,देवभोग सहित सभी ब्लाकों में है नियम विरूध्द संकुल समन्वयक

जिला युवक कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष हरीश यादव ने जिलाधीश गरियाबंद को पत्र लिखकर नियमानुसार नियुक्ति की मांग की है। ज्ञात हो कि गरियाबंद जिले के सभी विकासखंड मैनपुर,छुरा,देवभोग,गरियाबंद,फिगेश्वर के विकासखण्ड स्रोत केन्द्र समग्र शिक्षा कार्यालय के अन्तर्गत संकुल समन्वयकों की नियुक्ति कई वर्षों से चला आ रहा है। जो नियम विरुद्ध है। राकेश देवांगन जो माध्यमिक शाला गायडबरी संकुल केंद्र जरगांव में पदस्थ है उनको रानीपरतेवा का संकुल समन्वयक बनाया गया जो संकुल का संचालन अपने निवास अभनपुर से आकर करते है।रानीपरतेवा की दूरी अभनपुर से 85 किलोमीटर है।इसी प्रकार पाण्डुका संकुल में पदस्थ समन्वयक अभिजीत तिवारी रायपुर से आकर संकुल का कार्य करते है जिसकी दूरी 80 किलोमीटर है।जबकि अभिजीत तिवारी जिस स्कूल में पदस्थ है उस स्कूल में शिक्षको की कमी है।जहाँ के पालक गण कई बार शिक्षक व्यवस्था के लिए आवेदन लगा चुके है।अतरमरा संकुल समन्वयक दिनेन्द्र द्वेवेदी जो प्राथमिक शाला मोहतरा संकुल पोड में प्रधान पाठक के पद पदस्थ है,जिसको संकुल केंद्र अतरमरा संकुल समन्वयक बनाया गया है। जिसका पद प्रधान पाठक है जबकि एक संस्था संचालन के लिये प्रधान पाठक कितनी जरुरत है। जो अतरमरा संकुल में विगत 15 वर्षों से समन्वयक बन के बैठे है।केदार साहू जिसको पाटसिवनी का समन्वयक बनाया गया जबकि उनके मूल शाला में शिक्षको का टोटा है।मुड़ीपानी का समन्वयक सुशील वर्मा को बनाया गया है जबकि उनके मूल शाला एक शिक्षकीय है। यदु (सहायक शिक्षक) जो प्राथमिक शाला बोडराबाँधा संकुल दादरगाँव पुराना में पदस्थ है उनको छुरा के अंतिम छोर कोसमी संकुल समन्वयक बनाया गया है। इसी तरह विनोद सिन्हा, संतोष साहू,पंकज साहू,हेमलाल ध्रुव,योगेंद्र साहू, तौहीद आलम,माधव ध्रुव,शुशील वर्मा,फगवा साहू ये सभी संकुल समन्वयक बने है।आखिर इन सबके पीछे का राज क्या है।जो अपने निवास से इतनी दूरी तय कर एवं स्कुलो को एक शिक्षकीय कर संकुल संचालन के लिए सफर करते है। इसी प्रकार पूरे जिले में वर्षों से सहायक शिक्षक एवं प्रधान पाठक संकुल समन्वयक बन कर बैठे है। गरियाबंद विकासखण्ड में कई प्रधान पाठकों को संकुल समन्वयक बनाया गया है।जबकि प्रधान पाठकों को संकुल समन्वयक बनाना ही नही है।मैनपुर,फिगेश्वर,देवभोग,गरियाबंद विकासखण्डों में सहायक शिक्षको एवम प्रधान पाठकों को संकुल समन्वयक बनाया गया है।
जबकि एक संस्था को संचालित करने में प्रधान पाठकों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है लेकिन यहाँ तो प्रधान पाठकों को संकुल समन्वयक बनाया गया है।जिले के प्रधान पाठकों ने ऐसा क्या जादू चलाया की वे स्कूल छोड़ कर समन्वयक बन बैठे है।जबकि शासन द्वारा गाईडलाईन में तो प्रधान पाठक को समन्वयक बनाना ही नही है।शिक्षक एवम सहायक शिक्षको को समन्वयक बनाया जा सकता है।

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