रायपुर। सरकार के उदासीन और उपेक्षित रवैये से नाराज 13000 स्वास्थ्य संविदा NHM कर्मचारी में असंतोष व्याप्त है और कभी भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते है, जबकि धारा 144 लगी हुई है। गौरमतलब है कि, स्वास्थ विभाग का एक नवीन भर्ती आदेश निकला है, जिसमे समायोजन की मांग अब जोरशोर से उठ रही है, और शोषण के शिकार NHM संविदा स्वास्थ्य कर्मी अब न्याय पाने के लिए इस कठिन परिस्थिति में सड़क से संचालनालय तक लड़ाई लड़ने के लिए कमर कस चुके है।
छत्तीसगढ़ के एनएचएम संविदा कोरोना वारियर्स ने सरकार से नियमित पदों में समायोजन की मांग रखी
पूरा विश्व और भारत वर्ष इस समय इस सदी की सबसे बड़ी वैश्विक महामारी कोरोना से बड़ी गंभीरता के साथ लड़ रहा है। भारत के सभी राज्यो में नियमित चिकित्सा कर्मियों का साथ संविदा के 7 लाख से अधिक की संख्या अनुभवी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मी निभा रहे है, जिनमे से 35 कोरोना फ्रंटलाइन वारियर्स की कोरोना कालखंड में मृत्यु तक हो चुकी है।
इसी दौरान छत्तीसगढ़ राज्य शासन द्वारा अभी तत्कालीन स्वास्थ सेवाओ को सदृढ़ करने हेतु करीब 5 हज़ार से अधिक पदों पर नियमित अथवा संविदा भर्ती करने का निर्णय लिया गया है, जो कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और बेहतर बनाने की शासन की कवायद का एक अप्रतिम फैसला है, परन्तु इस भर्ती प्रक्रिया के नियम से राज्य की NHM में काफी रोष उतपन्न हो गया है।
NHM के राज्य प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय प्रकोष्ठ के सचिव हेमन्त सिन्हा ने बताया है कि, वर्तमान शासन जिस प्रकार से संविदा स्वास्थ्य कर्मियों को अनदेखा कर रही है, वो वाकायी में निंदनीय है और सरकार की कथनी और करनी की स्थिति को जगजाहिर करने वाली है। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव के जीत में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का बहुत बड़ा योगदान रहा है, खासकर वर्तमान विभागीय कैबिनेट मंत्री टी एस बाबा के समूचे सरगुजा सम्भाग में देखने को मिली है। ऐसे में जो भर्ती निकाली गई है, उसमे नियमित भर्ती में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों (NHM) का समायोजन ना करना और नियमितीकरण की कार्यवाही प्रचलित ना करना अत्यंत दुर्भाग्यजनक है और जन घोषणा पत्र में उल्लेखित अनियमित संविदा कर्मियों से किये गए नियमितीकरण करने के वायदों का पूर्णतः विपरीत है जो कि 13000 से अधिक छत्तीसगढ़िया संविदा स्वास्थ्य कर्मी (NHM) और उनके आश्रित परिवार को गंभीर परिस्थितियों की ओर लेकर जा रहा है।
यदि परिस्थितियां और बद्दतर हुई तो प्रदेश का पूरा स्वास्थ महकमा धराशयी हो जाएगा, जिस से प्रदेश की ढाई करोड़ की जनता अछूती नही रहेगी।
