? विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद ब्यूरो
गरियाबंद।सामाजिक कार्यकर्ता व कार्यकारी अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ युवा प्रकोष्ठ रायपुर संभाग एवं जनसंघ सेवक मंच प्रदेश संगठन महामंत्री रूप सिंग साहू ने बधाई देते हुए कहा है कि पोला का या पर्व छत्तीसगढ़ के लोक जीवन में कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा है कृषि कर्म एवं श्रम पर आधारित या पर्व हम सभी के लिए अच्छी फसल की कामना का संदेश लेकर आता है यह त्यौहार हमें खेती किसानी में पशुधन के महत्व को ध्यान में रखकर गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रोत्साहित करता है खेती किसानी में पशुधन के महत्व को दर्शाने वाला पोला पर्व छत्तीसगढ़ के सभी अंचलों में परंपरागत रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है इस दिन हम घर में ठेठरी खुरमी जैसे कई पकवान बनाकर बैलों और जाता-पोरा की पूजा करते हैं और अन्न, जन,धन से घर भरा होने की प्रार्थना करते हैं घरों में प्रतिमान स्वरूप मिट्टी के बैलों और बर्तनों की पूजा की जाती है जिसे बच्चों को खेलने के लिए दिया जाता है छत्तीसगढ़ का पोला तिहार मूल रूप से खेती किसानी से जुड़ा पर्व है सांस्कृतिक विरासत और परंपरा रही है कि हम खेती में सहायता के लिए पशु धन का आभार व्यक्त करते हैं अन्न और भोजन से संबंधित बर्तन को भी सम्मान देते हैं श्री साहू ने कहा है कि पारंपरिक पर्व पोला खरीफ फसल के द्वितीय चरण का कार्य पूरा हो जाने वह फसलों के बनने की खुशी में मनाया जाता है इस दिन किसानों द्वारा बैलों की पूजा कर कृतज्ञता दर्शाते हुए प्रेम भाव अर्पित किया जाता है क्योंकि बैलों के सहयोग से ही खेती कार्य किया जाता है वही पोला पर्व की पूर्व रात्रि को गर्भ पूजन किया जाता है ऐसा माना जाता है कि इसी दिन अन्न माता गर्भ धारण करती हैं अर्थात धान के पौधों में दूध भरता है इसी कारण पोला के दिन किसी को भी खेतों में जाने की अनुमति नहीं होती है प्रतिष्ठित सभी देवी देवताओं के पास जाकर विशेष पूजा आराधना करते हैं किसान गौमाता और बैलों को स्नान कराकर श्रृंगार करते हैं सींग और खुर यानी पैरों में माहुर लगाएंगे गले में घुंगरू घंटी कौड़ी के आभूषण पहना कर पूजा करते हैं श्री साहू ने कहा है कि यह पर्व बच्चों को हमारी संस्कृति और परंपराओं से परिचय कराने का भी अच्छा माध्यम है घरों में प्रतिमान स्वरूप मिट्टी के बैलों और बर्तनों की पूजा कर बच्चों को खेलने के लिए दिए जाते हैं जिससे बच्चे अनजाने ही अपने मिट्टी और उसके सरोकारों से जोड़ते हैं श्री साहू ने कोविड-19 के प्रकोप को देखते हुए ग्रामीणों और किसान भाइयों से पोला तिहार के मनाने के दौरान मास्क लगाने तथा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील की है श्री साहू ने कहा है कि भारत देश कृषि प्रधान देश है यह कृषि को अच्छा बनाने में मवेशियों का भी विशेष योगदान होता है भारत देश में इन मवेशियों की पूजा की जाती है पोला का त्यौहार उन्हीं में से एक है जिस दिन कृषक गाय बैलों की पूजा करते हैं या पोला का त्यौहार विशेष रूप से छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र में मनाया जाता है पोला के दिन किसान और अन्य लोग पशुओं की विशेष रूप से बैल की पूजा करते हैं उन्हें अच्छे से सजाते हैं पोला को बैल पोला भी कहा जाता है श्री साहू ने इस अवसर पर किसानों मजदूरों और समाज के सभी नागरिकों के लिए सुख समृद्धि की कामना करते हुए प्रदेश में अच्छी बारिश एवं अच्छी फसल की कामना ईश्वर से की है।
