- विधायक प्रतिनिधि अशोक साहू,जनपद सदस्य रश्मि भेदप्रकाश वर्मा,अजय साहू,ब्लॉक अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने क्षेत्र के किसानों से ली जानकारी
रानीतराई।खरीफ फसल की पैदावार लेने की तैयारी के बीच अर्बन तूफान का प्रकोप किसानों के सपनों को चकनाचूर करते हुए दिखाई दे रही है।पाटन ब्लाक के सभी गांवों में आसमान में घने बादल छाए रहने के साथ तेज बारिश,हवाओं के चलते तापमान में 6से7 डिग्री तक गिरावट महसूस की गई।धान की कटाई के बीच बिगड़े मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों के फसल को करीब 70 फीसदी तक नुकसान होने की आशंका जताई है।
क्षेत्र के खेतों एवं किसानों से जायजा लेने आज जिप दुर्ग के पूर्व उपाध्यक्ष अशोक साहू,जनपद सदस्य रश्मि भेदप्रकाश वर्मा,अजय साहू,ब्लॉक अध्यक्ष राजेश ठाकुर, उपाध्यक्ष भेष आठे किसानों के बीच पहुंचकर उनके खेतों का जायजा लिए।
किसान सुरेंद्र साहू करेला निवासी के अनुसार इन दिनों खेतों में हरुना धान की कटाई चल रही है। कुछ किसानों की फसल अभी खेतों में खड़ी है,जबकि कुछ किसान ने धान काटकर खेतों में ही रखी है। ऐसे में बारिश से खड़ी फसल गिरने, धान की बालियों को नुकसान पहुंचने और कटी हुई फसल के भीगकर खराब होने का खतरा बढ़ गया है। नमी के कारण धान की गुणवत्ता प्रभावित होने से मंडी में उचित दाम मिलने में भी परेशानी हो सकती है।
निपानी सरपंच राजेश ठाकुर ने बताया कि तेज बारिश से स्वयं के 6 एकड़ के धान के फसल पानी मे डूबा हुआ है।ईश्वर ठाकुर सन्तोष ठाकुर भूपेंद्र सिन्हा निपानी किसानो ने बताया कि गांव के करीब सैकड़ो किसानों का धान बर्बाद हुआ है।
ग्राम असोगा के किसान हेमलाल,नारद,अमित,धनंजय वर्मा डोमन चंद्राकर के फसल बर्बाद होने जानकारी दी।आज ग्राम भंसूली,जरवाय,कौही, असोगा,खपरी,निपानी, ओदरागहन, बटरेल तक ग्रामों का दौरा कर किसानों से मिलकर उनके फसल की जानकारी ली,साथ ही शासन प्रशासन से स्थिति का जायजा लेकर जल्द मुआवजा दिलाने हेतु मांग की गई है।
विधायक प्रतिनिधि अशोक साहू ने पाटन तहसीलदार से टेलीफोनिक चर्चा कर क्षेत्र के किसानों की फिजिकली जानकारी दिया गया।
पाटन तहसीलदार मनोज गुप्ता ने संबंधित विभागों को अलर्ट रहने और आपात स्थिति से निपटने की तैयारी रखने के निर्देश भी दी।
प्रशासन ने नागरिकों से खराब मौसम में सतर्क रहने, नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। वहीं, किसान अब मौसम खुलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि धान की फसल को अधिक नुकसान से बचाया जा सके।
