- सात महीने चक्कर काटने के बाद नियम में बदलाव किसानों के साथ भद्दा मजाक है
पाटन। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के लिए एग्रीस्टेक पंजीयन के नियमों में किए गए बदलाव को लेकर पूर्व अध्यक्ष जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग जवाहर वर्मा ने विष्णुदेव साय सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एग्रीस्टेक पंजीयन की जटिल प्रक्रिया और संयुक्त खातेदारों से जुड़ी अनिवार्य शर्तों के कारण प्रदेश के किसानों को बीते कई महीनों से मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा है।
जवाहर वर्मा ने कहा कि जब अधिकांश किसान कठिनाइयों के बीच एग्रीस्टेक पोर्टल पर अपना पंजीयन करा चुके हैं, तब सरकार द्वारा संयुक्त खातेदारों की अनिवार्यता समाप्त कर केवल लंबरदार का पंजीयन मान्य करने का आदेश जारी करना प्रशासनिक अदूरदर्शिता को उजागर करता है। यदि अंततः नियमों में राहत देनी ही थी, तो यह निर्णय धान खरीदी सीजन की शुरुआत में ही क्यों नहीं लिया गया?
उन्होंने कहा कि किसानों को कागजी कार्रवाई पूरी करने और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने में समय और धन खर्च करना पड़ा। अंतिम समय में नियमों में बदलाव करना सरकार की लचर कार्यशैली को दर्शाता है। इससे किसानों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ी है।
जवाहर वर्मा ने मांग की कि सरकार और संबंधित विभाग अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेते हुए छत्तीसगढ़ के किसानों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में नियमों का निर्धारण समय रहते और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाकर किया जाना चाहिए, ताकि अन्नदाताओं को बार-बार प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण परेशान न होना पड़े।
उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले पर आत्ममंथन करने और भविष्य में किसानों को ऐसी समस्याओं से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
इसे संक्षिप्त समाचार शैली में करें
मांगों को अधिक प्रभावी बनाएं
आरोपों की भाषा संतुलित करें
