जिन मुश्किलों का सामना मैंने किया है, वह इन बच्चों को करना न पड़े।” — शिक्षक महेंद्र कुमार बोर्झा,,,

खबर हेमंत तिवारी,,,,,,,,,,,,,,,

शासकीय स्कूल की तस्वीर बदलने में जुटे एक आदिवासी शिक्षक की प्रेरक कहानी

पाण्डुका / राजधानी रायपुर से लगभग 160 किलोमीटर दूर आदिवासी विकासखंड नगरी की शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बोडरा आज सरकारी शिक्षा में बदलाव की प्रेरक मिसाल बन चुकी है। विद्यालय के प्रधानपाठक महेंद्र कुमार बोर्झा ने सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बीच यह संकल्प लिया कि गांव के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

उनकी सोच है— “जिन मुश्किलों का सामना मैंने किया है, वह इन बच्चों को करना न पड़े।” इसी संकल्प के साथ वे निरंतर विद्यालय और विद्यार्थियों के लिए कार्य कर रहे हैं। वे इस सफलता का श्रेय स्वयं को नहीं, बल्कि शाला के समस्त स्टाफ, ग्रामवासियों के सहयोग और विद्यार्थियों की लगन को देते हैं।
विद्यालय का समय सुबह 10 बजे है, लेकिन श्री बोर्झा लगभग 8:30 बजे ही स्कूल पहुंच जाते हैं। सुबह 9:15 से 9:45 बजे तक वे अंग्रेजी की कक्षा लेते हैं। इसके अलावा वे वर्ष 2019 से सुबह 6:30 बजे Zoom App के माध्यम से ऑनलाइन अंग्रेजी कक्षा संचालित कर रहे हैं, जिसमें कक्षा 6 से एम.ए. तक के विद्यार्थी और अनेक शिक्षक जुड़ते हैं। शाम 7 से 8 बजे तक भी ऑनलाइन कक्षा संचालित होती है, जिसमें धमतरी, गरियाबंद, बस्तर और महासमुंद के शिक्षक एवं विद्यार्थी शामिल होते हैं।


इन प्रयासों का परिणाम है कि बोडरा स्कूल के कक्षा 6 से 8 तक के बच्चे आज आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी बोलते और लिखते हैं। विद्यालय के विद्यार्थी प्रतिवर्ष प्रयास आवासीय विद्यालय और NMMS जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित होते हैं। पिछले पांच वर्षों में गांव के 16 छात्र-छात्राएं शासकीय सेवा में प्रवेश कर चुके हैं।
विद्यालय की सामुदायिक सहभागिता भी इसकी विशेष पहचान है। विभिन्न जिलों से शिक्षक, विद्यार्थी और विद्यालय प्रबंधन समितियां यहां की कार्यप्रणाली देखने पहुंच चुकी हैं। धमतरी कलेक्टर तथा जिला पंचायत के पूर्व एवं वर्तमान मुख्य कार्यपालन अधिकारियों ने भी विद्यालय का भ्रमण कर इसकी सराहना की है।


श्री बोर्झा का शिक्षा के प्रति समर्पण छुट्टियों में भी जारी रहता है। गर्मी की छुट्टियों में वे विभिन्न ग्रामों में आयोजित शैक्षणिक शिविरों में शामिल होकर अपनी सेवाएं देते हैं। वे बताते हैं कि स्कूल दशहरा में एक दिन, दीपावली में तीन दिन और होली में एक दिन ही बंद रहता है। रविवार को भी आवश्यकता के अनुसार कुछ घंटों के लिए विद्यालय खुलता है।
विद्यालय में प्रतिवर्ष 22 एवं 23 जनवरी को FLN एवं विज्ञान मेले का आयोजन होता है, जिसमें विभिन्न जिलों से लोग पहुंचते हैं। इस अवसर पर विशाल भंडारे में लगभग 3 से 4 हजार लोग भोजन ग्रहण करते हैं। विद्यार्थियों को शैक्षिक भ्रमण पर हायर सेकेंडरी स्कूलों एवं ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराया जाता है। स्कूल के किचन गार्डन में उगाई गई साग-सब्जियों का उपयोग मध्यान्ह भोजन में किया जाता है।


महेंद्र कुमार बोर्झा को उत्कृष्ट प्रधानपाठक जिला स्तरीय सम्मान, मुख्यमंत्री शिक्षा दूत, ज्ञान दीप तथा राज्य स्तरीय शिक्षा वारियर सम्मान प्राप्त हो चुका है। वर्ष 2025 में राज्यपाल महोदय द्वारा भी उन्हें उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।


बोडरा की यह कहानी केवल एक शिक्षक की कहानी नहीं, बल्कि समर्पण, सामुदायिक सहयोग और विद्यार्थियों की मेहनत से शासकीय विद्यालय की तस्वीर बदलने की कहानी है। शिक्षक दिवस पर यह विद्यालय और इसके शिक्षक पूरे समाज को यही संदेश देते हैं कि दृढ़ संकल्प हो तो सीमित संसाधनों में भी बच्चों के सपनों को नई उड़ान दी जा सकती है।

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