पाटन ब्लॉक की सहकारी समितियों में खाद एवं बीज का पर्याप्त भण्डारण… कुर्मीगुण्डरा में पीएम आवास के 15 अपात्रों पर हुई पारदर्शी कार्रवाई

दुर्ग/ जिला प्रशासन दुर्ग द्वारा खरीफ सीजन 2026 के दौरान कृषकों को सुचारू रूप से कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने हेतु निरंतर मैदानी स्तर पर समीक्षा एवं जांच की जा रही है। इसी कड़ी में पाटन विकासखंड के अंतर्गत कृषि विभाग द्वारा पर्याप्त खाद-बीज का सुव्यवस्थित भंडारण सुनिश्चित किया गया है, वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राप्त शिकायतों पर त्वरित एवं पारदर्शी कार्रवाई की गई है। कृषि एवं बीज निगम के अधिकारियों ने बताया कि आईएमएफएस (iMFS) पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक विकासखंड पाटन में इस वर्ष खरीफ 2026 में अब तक यूरिया 5556.78 मीट्रिक टन, एसएसपी 2763.07 मीट्रिक टन, पोटाश 1314.60 मीट्रिक टन, डीएपी 1105.05 मीट्रिक टन एवं एनपीके 1026.90 मीट्रिक टन का अद्यतन भंडारण सहकारी समितियों में किया जा चुका है। गत वर्ष खरीफ 2025 की समान अवधि की तुलना में इस वर्ष यूरिया में 959 मीट्रिक टन, एसएसपी में 460 मीट्रिक टन तथा पोटाश में 506 मीट्रिक टन का अधिक भंडारण दर्ज किया गया है। डीएपी की आंशिक कमी की स्थिति में किसानों को वैकल्पिक एवं अधिक पोषक तत्वों वाले उर्वरकों जैसे एसएसपी (SSP), टीएसपी (TSP), एनपीके (NPK) और नैनो डीएपी के उपयोग हेतु लगातार प्रोत्साहित एवं वितरित किया जा रहा है।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ और बीज निगम रूआबांधा के पास पर्याप्त मात्रा में खाद और लगभग 2790 क्विंटल बीज का बफर स्टॉक शेष है, जिससे क्षेत्र में किसी भी प्रकार की किल्लत की स्थिति नहीं है।

इसी प्रकार, शासन की कल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता और वास्तविक हकदारों को लाभ दिलाने की प्रतिबद्धता के तहत ग्राम पंचायत कुर्मीगुण्डरा में प्रधानमंत्री आवास योजना के संबंध में प्राप्त शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की गई। जिला प्रशासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच दल द्वारा स्थानीय सरपंच एवं सचिव की उपस्थिति में डोर-टू-डोर (घर-घर) सघन भ्रमण कर भौतिक सत्यापन किया गया। इस निष्पक्ष जांच में शिकायत के दायरे में आए सभी 15 हितग्राहियों के पास पूर्व से ही स्वयं का पक्का मकान होना पाया गया। नियमों के अनुरूप पक्का मकान होने के कारण पात्रता की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर, जिला स्तरीय अपीलीय समिति के अनुमोदन और गहन परीक्षण के उपरांत इन सभी 15 आवेदकों को विधिवत अपात्र घोषित किया गया है, ताकि योजना का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों को ही मिल सके।

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