- पतोरा पंचायत में कथित फिक्स डिपाजिट का मामला गहराया
पाटन। जनपद पंचायत पाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत पतोरा में कथित फिक्स डिपॉजिट मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पंचायत प्रस्ताव के अनुसार गौठान के पास निर्मित 8 दुकानों की नीलामी से प्राप्त कुल 14.31 लाख रुपए की राशि को अधिकतम ब्याज देने वाले बैंक में फिक्स डिपॉजिट किया जाना था, लेकिन कार्यभार सौंपते समय केवल 6.50 लाख रुपए की कथित एफडी होने की जानकारी दी गई। खास बात यह रही कि इस कथित एफडी से संबंधित कोई दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराया गया। बाद में जानकारी सामने आई कि उक्त राशि का फिक्स डिपॉजिट ही नहीं हुआ था, जिससे पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रस्ताव में पूरी राशि एफडी करने का उल्लेख…..
सूचना से प्राप्त जानकारी के अनुसार 30 दिसंबर 2024 को पंचायत में प्रस्ताव पारित कर गौठान के पास निर्मित 8 दुकानों की नीलामी की गई थी। इसमें 1.60 लाख रुपए अमानत राशि तथा 12.71 लाख रुपए नीलामी राशि सहित कुल 14.31 लाख रुपए प्राप्त हुए थे। प्रस्ताव में स्पष्ट उल्लेख था कि पूरी राशि को अधिकतम ब्याज देने वाले बैंक में फिक्स डिपॉजिट किया जाएगा।
14.31 लाख की जगह केवल 6.50 लाख की कथित एफडी…..
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पंचायत प्रस्ताव के अनुसार जहां पूरी 14.31 लाख रुपए की राशि एफडी की जानी थी, वहीं कार्यभार सौंपते समय केवल 6.50 लाख रुपए की कथित एफडी का ही उल्लेख किया गया। शेष राशि कहां गई और उसका क्या उपयोग हुआ, इसे लेकर पंचायत प्रतिनिधियों ने सवाल खड़े किए हैं।
रोकड़ बही में नहीं बैंक और चेक का विवरण…….
पंचायत की रोकड़ बही में 31 मार्च 2025 को एफडी हेतु पृथक चेक जमा करने का उल्लेख तो दर्ज है, लेकिन उसमें न तो बैंक का नाम दर्ज है और न ही चेक क्रमांक का उल्लेख किया गया है। इससे पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है।
11 महीने बाद किया गया उल्लेख…..
करीब 11 महीने बाद रोकड़ बही में यह उल्लेख किया गया कि आजीविका दुकान नीलामी की राशि फिक्स डिपाजिट के लिय चेक जमा था परंतु पंचायत स्थापना सन में त्रुटि होने एवं पैन नंबर दर्ज नहीं होने के कारण उक्त राशि 6.50 लाख खाता में समायोजन जमा होने का उल्लेख किया गया है।
एसडीएम और कलेक्टर को सौंपा आवेदन…..
वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों ने 17 अप्रैल को एसडीएम को तथा 11 मई को सुशासन तिहार के दौरान कलेक्टर को मामले की जांच के लिए आवेदन सौंपा था। वहीं जिला पंचायत कार्यालय ने 5 मई को पूर्व एवं वर्तमान सरपंच-सचिव से अभिमत प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए थे।
जांच में देरी से नाराजगी……
अब तक मामले की जांच का कोई स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आया है। जांच में हो रही देरी को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर राशि के दुरुपयोग के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
