नोटिस के बाद लाइसेंस निलंबित, फिर भी जारी अस्पताल का संचालन ,,आदेश को ठेंगा,,,कही दिखावे की कार्यवाही तो नहीं ।।

खबर हेमंत तिवारी,,,,,,,,,

छुरा/। दिसंबर 2025 में सड़क दुर्घटना में घायल एक युवक के इलाज के दौरान कथित लापरवाही और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों को लेकर प्रकाशित समाचार के बाद गठित जिला स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने 2 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ संकल्प मिशन अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी कर 30 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। नोटिस में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति में अस्पताल का अनुज्ञा पत्र निरस्त किए जाने की कार्रवाई की जा सकती है।जांच समिति द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में मरीज के उपचार से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों और प्रक्रियाओं में गंभीर कमियां सामने आई थीं। मरीज की स्थिति को लेकर दर्ज जीसी और एसपीओ-2 के आंकड़ों में विरोधाभास पाया गया, जबकि ग्लासगो कोमा स्केल (जीसीएस) जैसे महत्वपूर्ण परीक्षण का रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं था। एयरवे प्रबंधन, एनेस्थीसिया के दौरान अपनाए गए न्यूरो-प्रोटेक्टिव उपाय, प्री-एनेस्थीसिया फिटनेस और अन्य आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का भी समुचित दस्तावेजीकरण नहीं मिला। जांच में यह भी पाया गया कि सिर में गंभीर चोट होने के बावजूद न्यूरोसर्जिकल ओपीनियन नहीं लिया गया तथा सीटी स्कैन और रेडियोलॉजी संबंधी अभिलेखों में भी कई विसंगतियां मौजूद थीं।जांच रिपोर्ट में एक्स-रे, पेरि-ऑपरेटिव रिकॉर्ड, फ्लूड मैनेजमेंट, इनपुट-आउटपुट मॉनिटरिंग, दैनिक उपचार नोट्स और एनेस्थीसिया से संबंधित दस्तावेजों को भी अपूर्ण और त्रुटिपूर्ण बताया गया था। समिति ने इन सभी बिंदुओं को गंभीर लापरवाही की श्रेणी में मानते हुए अस्पताल के जवाब को असंतोषजनक पाया था।

इसी आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को अंतिम अवसर देते हुए 30 दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।हालांकि निर्धारित अवधि समाप्त होने के कई सप्ताह बाद 19 मई 2026 को एक नया आदेश जारी कर अस्पताल का लाइसेंस एक माह के लिए निलंबित कर दिया गया। लेकिन लाइसेंस निलंबन का आदेश जारी होने के तीन दिन बाद भी अस्पताल के सामान्य रूप से संचालित होने की जानकारी सामने आने से पूरे मामले में नई चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि यदि अस्पताल का लाइसेंस निलंबित किया जा चुका है तो आदेश के पालन की निगरानी और क्रियान्वयन किस स्तर पर किया जा रहा है।मामले में यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि 30 दिनों में जवाब मांगे जाने के बावजूद अंतिम कार्रवाई निर्धारित अवधि के काफी बाद की गई। वहीं निलंबन आदेश के बाद भी अस्पताल का संचालन जारी रहने से प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता और गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं प्रमाणित हुई हैं और कार्रवाई की गई है तो उसका असर भी जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई देना चाहिए।

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