आस्था का प्रतीक धर्म नगरी राजिम में कुंभ कल्प का आज से आगाज ,,,हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने महानदी में किया पवित्र स्नान,,,,

खबर हेमंत तिवारी,,,,,,,,,,,✍️✍️✍️
राजिम/ श्रद्धा और आस्था का प्रतीक राजिम कुंभ कल्प की आज से शुरुवात हो गई है, राजिम कुंभ कल्प में शामिल होने के लिए देश विदेश के लाखों श्रद्धालू राजिम पहुचेंगे, श्रद्धालूओं के त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने का सिलसिला सुबह 4 बजे से ही शुरु हो गया है, जो आज दिनभर जारी रहेगा।प्रति वर्ष माघ पुर्णिमा से महाशिवरात्री तक राजिम मेला आयोजित होता है, देश विदेश के लाखो लोग राजिम के पवित्र त्रिवेणी संगम में उसी आस्था और विश्वास के साथ डुबकी लगाते है, स्नान करते है, जिसकी शुरुवात आज मांघ पूर्णिमा के प्रथम स्नान के साथ शुरू हो गया है, हजारों श्रद्धालूओं ने सुबह त्रिवेणी संगम में स्नान किया, उसके पश्चात भगवान राजीव लोचन और कुलेश्वरनाथ के दर्शन कर रहे है, श्रद्धालूओं के त्रिवेणी स्नान का ये सिलसिला आज दिनभर जारी रहेगा।

पूरे देश वा प्रदेश में राजिम कुंभ कल्प की अपनी एक अलग ही पहचान है, पैरी, सोंढूर और महानदी, तीन पवित्र नदियों के संगम स्थल राजिम त्रिवेणी संगम पर ये राजिम कुंभ कल्प आयोजित होता है, त्रिवेणी संगम के एक तट पर भगवान विष्णु श्री राजीवलोचन के रूप में विराजमान है, और दुसरे तट पर सप्तऋषियों में से एक लोमश ऋषि का आश्रम विद्यमान है, त्रिवेणी संगम के बींचो बीच खुद महादेव कुलेश्वरनाथ के रुप में स्थापित है, वैसे तो श्रद्धालूओं के यहॉ पहुंचने का सिलसिला सालभर लगा रहता है, मगर राजिम कुंभ मेले के समय श्रद्धालूओं के पहुंचने की संख्या कई गुणा बढ़ जाती है, राजीव लोचन और कुलेश्वरनाथ जी मंदिर दर्शन के लिए श्रद्धालूओं को घंटो लाईन में खडा होना पड़ता है।आस्था के साथ ही मोक्ष मार्ग प्रशस्त होने की मान्यता से यह कुम्भ कल्प अलौकिक हो जाता है।

,,,,,, श्रद्धा और भक्ति का दुसरा नाम ही भगवान है, जहॉ श्रद्धा है, वहां भक्ति है, और जहॉ भक्ति है, वहाँ भगवान है, भगवान के दर्शनों की चाहत और मोक्ष प्राप्ति की कामना को लेकर श्रद्धालूओं का राजिम कुंभ कल्प में पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है, जो 15 फरवरी महाशिवरात्री तक जारी रहेगा।

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