हम आदिवासी विशाल प्रकृति के पुजारी है- पंकज मांझी

विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद ब्यूरो चीफ

अमलीपदर। आज 9 अगस्त विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर अमलीपदर ब्लॉक युवा कांग्रेस अध्यक्ष पंकज मांझी ने आदिवासी के महत्वाकांक्षा बतलाया जिसने हम आदिवासी वेशभूषा कला एवं प्राचीन परंपराओं को समेटे हुए हैं।

राज्य के कांग्रेस सरकार भी हमारी हितेषी सरकार है

छत्तीसगढ़ देश के उन प्रदेशों में शामिल है, जहां पर करीब 32 प्रतिशत आदिवासी निवासरत हैं, जो अनेकों परम्पराओं को संजोए हुए हैं. इनकी संस्कृति और परम्पराएं अनूठी है. और कुछ दिन पहले हुई चीन भारत की बॉर्डर पर आदिवासी सैनिक गणेश् मरकाम ने भी देश के लिए बलिदान दिया ,आदिवासी समाज ने नदी, नाले, तालाबों, झरनों, पर्वतों, शिखरों, गुफा, कंदराओं, लता, वृक्ष, पशु-पक्षी में भी देवशक्तियों को अवतरित कर उनके प्रति आदर भाव प्रदर्शित किया है. ऐसे भावों के कारण ही आदिवासी समाज सहज रूप से समृद्ध हुआ है. श्री पंकज मांझी ने कहा कि हमारे आदिवासी समाज के लोग सदैव प्राचीन समय से संस्कृति-परंपराओं एवं प्रकृति के संरक्षक रहे हैं. इतिहास गवाह है कि समय आने पर वे देश की रक्षा के लिए आक्रमणकारियों के खिलाफ उठ खड़े हुए और बलिदान भी दिया।

इस समाज में बिरसा मुण्डा, वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर, रानी दुर्गावती, रघुनाथ शाह, शंकर शाह, बादल भोई, टंटया भील जैसे महान लोग अवतरित हुए हैं, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए प्राणों की आहूति दे दी. इस अवसर पर मैं उन्हें नमन करता हूँ, एवं समस्त आदिवासी बंधुओं और देशवासियों को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं दिया।

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