क्रियात्मक अनुसंधान बना औजार, बच्चों की पढ़ने की क्षमता में आई धार

  • सीने तारिका सोनाली कुलकर्णी से बच्चों की सीधी बातचीत, ‘बोलेगा बचपन’ से मिली प्रेरणा


पाटन। संकल्प शक्ति के सामने हर कठिनाई बौनी साबित होती है। यह कथन नहीं, बल्कि व्यवहारिक सत्य है। जब किसी शिक्षक के भीतर आत्मविश्वास, नवाचार और समर्पण का जुनून हो, तो उसके शिष्य असाधारण उपलब्धियां हासिल करते हैं। ऐसे ही एक समर्पित शिक्षक हैं शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुम्हली के शिक्षक छन्नूलाल साहू, जिन्होंने क्रियात्मक अनुसंधान को शिक्षण का औजार बनाकर बच्चों की पढ़ने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार किया है।
शिक्षक छन्नूलाल साहू ने अपने शैक्षिक अनुसंधान के आधार पर कक्षा चौथी एवं पांचवीं के विद्यार्थियों में हिंदी व अंग्रेजी रीडिंग स्किल को सशक्त किया। परिणामस्वरूप बच्चे हिंदी में 180 शब्द प्रति मिनट तथा अंग्रेजी में 160 शब्द प्रति मिनट की गति से पढ़ने में सक्षम हो गए। यह उपलब्धि राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रेरणादायक मानी जा रही है।


इसी उल्लेखनीय कार्य के चलते शिक्षक एवं विद्यार्थियों को प्रख्यात फिल्म अभिनेत्री एवं लेखिका श्रीमती सोनाली कुलकर्णी द्वारा प्रायोजित ‘बोलेगा बचपन’ कार्यक्रम में सहभागिता का अवसर मिला। इस कार्यक्रम के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बच्चों की सोनाली कुलकर्णी से सीधी बातचीत हुई। छत्तीसगढ़ से कुल 20 शिक्षक एवं उनके विद्यार्थी इस कार्यक्रम में शामिल हुए, जिनमें दुर्ग जिले से तीन शिक्षकों को यह अवसर प्राप्त हुआ। विकासखंड पाटन से शिक्षक छन्नूलाल साहू को अपने अनुभव और नवाचार साझा करने का प्रतिनिधित्व मिला।
कार्यक्रम के दौरान सोनाली कुलकर्णी ने बच्चों से आत्मीय संवाद करते हुए उन्हें कहानी लेखन और अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित किया तथा उनके प्रश्नों का बालसुलभ अंदाज में उत्तर देकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
उल्लेखनीय है कि सत्र 2024 में समग्र शिक्षा के अंतर्गत मासिक क्रियात्मक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने वाली पत्रिका ‘चर्चा पत्र’ में भी शिक्षक छन्नूलाल साहू के कार्य को चिट्ठी-पत्री लेखन के माध्यम से बच्चों के शैक्षिक विकास हेतु स्थान मिला था। विगत दो वर्षों से वे विद्यालय स्तर पर देश के सबसे बड़े पांच दिवसीय दीपावली महोत्सव का एकीकृत एकदिवसीय आयोजन सफलतापूर्वक करा चुके हैं, जो संभवतः छत्तीसगढ़ में विद्यालय स्तर पर प्रथम उदाहरण है। इससे बच्चों में भारतीय संस्कृति, सभ्यता एवं छत्तीसगढ़ी आदिवासी संस्कृति की गहरी समझ विकसित हुई है।
कोरोना काल में भी शिक्षक द्वारा सुरक्षित मुहल्ला क्लास का आयोजन ब्लॉक स्तर पर सराहनीय रहा। वहीं देवार समुदाय के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने हेतु प्रतिदिन मुहल्ला भ्रमण कर बच्चों को विद्यालय तक लाने का कार्य भी अत्यंत अनुकरणीय रहा है।
‘बोलेगा बचपन’ कार्यक्रम में सहभागिता के लिए सोनाली कुलकर्णी की ओर से विनोबा एप टीम द्वारा स्मृति भेंट स्वरूप प्रमाण पत्र प्रदान किया गया, जिसे विद्यालय की प्रधान पाठक श्रीमती प्रभा सिंह के हाथों शिक्षक को सौंपा गया। प्रधान पाठक ने बधाई देते हुए कहा कि “किसी भी उपलब्धि के लिए आत्मविश्वास और संकल्प आवश्यक होता है, और यह गुण हमारे शिक्षक में कूट-कूटकर भरा है।”
विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री डालेंद्र देवांगन ने दूरभाष पर बधाई देते हुए कहा कि “आपका शिक्षा के प्रति समर्पण और नवाचार हजारों विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को दिशा देने वाला है।”
इस अवसर पर सोनाली कुलकर्णी टीम के जिला समन्वयक सौरभ साहू, संभागीय समन्वयक हेमंत साहू, शिक्षिकाएं सीमा चंद्राकर, यशोदा नायक, तथा अनेश्वर चंद्राकर, हुषनलाल चंद्राकर उपस्थित रहे।

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