पाहंदा में धड़ल्ले से चल रहा अवैध मुरुम खनन, विभागीय उदासीनता पर उठ रहे सवाल.

पाटन। उत्तर पाटन के ग्राम पंचायत पाहंदा (अ) में अवैध रूप से मुरुम खनन का कारोबार इन दिनों चरम पर है। मुख्य मार्ग से कुछ दूरी पर बड़े तालाब के किनारे चैन माउंटेन मशीनों की मदद से तेजी से मुरुम निकाला जा रहा है और हाइवा वाहनों के माध्यम से अन्य क्षेत्रों में पहुंचाकर खुलेआम बिक्री की जा रही है। तालाब किनारे क़ी खनन पूर्ण होने के बाद अब किसानो को लोभ देकर उनके जमीनो को चिरकर मुरुम निकाल कर उसकी बिक्री क़ी जा रही है.
दिन के उजाले में बेखौफ चल रहे इस अवैध धंधे से मुरुम माफियाओं के बढ़ते हौसले का अंदाज़ा साफ लगाया जा सकता हैन उन्हें शासन का डर है, न ही प्रशासन का.

जब इस अवैध गतिविधि को लेकर ग्राम पंचायत पाहंदा (अ) की सरपंच इसरावती ठाकुर से सवाल किया गया तो उन्होंने पंचों की सहमति और गांव में मुरुम के उपयोग की बात कहकर मामले को टाल दिया। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि कुछ महीनों पूर्व खनिज विभाग द्वारा दी गई अनुमति अब समाप्त हो चुकी है, इसके बावजूद मुरुम खनन और परिवहन लगातार जारी है.

ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर अवैध मुरुम खनन बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं है। उत्तर पाटन क्षेत्र के कुछ बड़े भाजपा नेताओ का संरक्षण होने की चर्चा तेज है, जिसके चलते मुरुम माफिया बिना किसी भय के खुलेआम खनन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि राजनैतिक सहारा न होता तो बिना अनुमति इतनी बड़ी मशीनरी और हाइवा से दिनदहाड़े परिवहन करना संभव नहीं था।

खनिज विभाग की चुप्पी और उदासीनता पर गंभीर प्रश्न

इसकी सुचना दो दिन पहले खनिज विभाग के अधिकारि दीपक तिवारी को मोबाईल फोन के माध्यम से इसकी जानकारी दी गई थी और कार्रवाई का आश्वासन भी मिला था, लेकिन अब तक किसी अधिकारी का मौके पर पहुंचना तक नहीं हुआ है। लगातार हो रहे खनन पर विभाग की यह चुप्पी और उदासीनता कई सवाल खड़े कर रही है—क्या विभाग जानबूझकर अनदेखी कर रहा है, या फिर माफियाओं का प्रभाव विभाग पर भी हावी है.

फसल कटाई के बाद और बढ़ा अवैध मुरुम परिवहन

आस-पास के गांवों में फसल कटाई पूरी होने के बाद हाइवा और मशीनों की आवाजाही अचानक बढ़ गई है। खेतों, तालाबों और खाली ज़मीनों पर दिन-रात मशीनरी चल रही है और बड़े पैमाने पर मुरुम का परिवहन किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे न केवल पर्यावरण और जमीन की संरचना बुरी तरह प्रभावित हो रही है, बल्कि तालाबों और चरागाहों पर भी खतरा मंडरा रहा है.

लगातार बढ़ते अवैध खनन से आस पास ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल छापेमारी कर खनन रोकने, मशीनें जब्त करने और शामिल माफियाओं व संरक्षण देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले दिनों में गांव की जमीन, तालाब और पर्यावरण को अपूरणीय नुकसान झेलना पड़ेगा…

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