फीस के लिए निजी स्कूल संचालक कर रहे पालकों को मैसेज…

? –रिपोर्ट विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद ब्यूरो

  • हाईकोर्ट का फैसला और शिक्षा विभाग की लचर व्यवस्था के बीच विकासखंड के निजी स्कूलों ने पालकों से फीस वसूली शुरू कर दी है। ऐसी स्थिति में क्षेत्र के पैरेंट्स ने शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग को ज्ञापन सौंपकर ट्यूशन फीस को परिभाषित और अनुमोदित करने की मांग की है।

पालकों का कहना है कि अंचल के स्कूलों में सशर्त फीस लेने के हाईकोर्ट के फैसले को निजी स्कूलों ने ताक पर रख कर मनमानी करना आरंभ कर दिया है। हाईकोर्ट का फैसला 27 जुलाई को इंटरनेट में अपलोड होने के कुछ ही घंटे बाद ही पालकों के पास फीस वसूली के लिए ईमेल और मैसेजेस आना आरंभ हो गया है। ऐसे में हाईकोर्ट के फैसले की आड़ में निजी स्कूल वाले पालकों से मोटी फीस वसूलने की आशंका सच साबित होती नजर आ रही है। कई स्कूलों ने साफ कह दिया है कि हाईकोर्ट ने स्कूलों को फीस लेने अनुमति दे ही है, इसलिए बैंकों के माध्यम से तत्काल फीस की दो किश्तें जमा कर दीजिए। उन्होंने बताया कि कई स्कूलों ने इस शिक्षा सत्र 2020-21 में फीस वृद्घि की है, तो कई स्कूलों ने फीस जमा करने की तिथि भी निर्धारित कर दी है, जो हाईकोर्ट के निर्णय का स्पष्ट उल्लंघन ह।. जबकि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट कहा है कि स्कूल सिर्फ ट्यूशन फीस ही लेंगे और शिक्षा सत्र 2020-21 में फीस में वृद्घि नहीं की जाएगी। इसके अलावा फीस जमा करने के लिए पालकों को विकल्प भी दिया गया है। क्षेत्र के पैरेंट्स का कहना है कि स्कूल शिक्षा विभाग, डीपीआई और डीईओ की यह जिम्मेदारी है कि वह ट्यूशन फीस को पहले परिभाषित करें और यह सुनिश्चित करे कि स्कूल वाले जो फीस वसूल रहे है वह सिर्फ ट्यूशन फीस ही है और डीईओ द्वारा अनुमोदित किया गया है लेकिन शिक्षा विभाग को इसमें कोई रुचि नहीं है।

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