खबर हेमंत तिवारी
पांडुका(छुरा) विकासखंड छुरा के जनपद कार्यालय में अगर आप सूचना के अधिकार के तहत अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए यहां अगर आवेदन लगते हैं तो यह भूल जाइए की आपको आवेदन की जानकारी या जवाब मिलेगा । यहां आवेदन देना अपने अधिकार को मजाक बनाना है। और तय समय में जवाब की उम्मीद करना बेइमानी है ।जनपद सहित ग्राम पंचायत में यह संस्कृति सालों से निभाई जा रही है।इस बार भी जन सूचना अधिकारी जनपद पंचायत छुरा के द्वारा भी यह संस्कृति बखूबी निभाई गई है।और ऐसा होना कोई ताज्जुब की बात नहीं है । जनपद पंचायत छुरा या उनके अधीनस्थ ग्राम पंचायत में हुई विभिन्न विकास कार्यों की जानकारी या फिर उनसे जुड़े गड़बड़ी को आम जनता को जानने का पूरा अधिकार है । क्योंकि कई आवेदक ऐसे होते हैं जो ग्राम सभा या फिर सचिव सरपंच से पूछे जाने पर जानकारी नहीं बताते या फिर लिखित में जवाब मांगे जाने पर नहीं देते ऐसे में सूचना के अधिकार का यह अधिनियम 2005 में लागू तो कर दिया गया पर इसके परिपालन कहीं भी सही तरीका से नहीं होता जिस वजह से यह अधिनियम आम जनता से कोसों दूर हो रहा है तय समय में जानकारी नहीं मिलने से आवेदक हताश हो जाते हैं प्रथम अपील, द्वितीय अपील या फिर आयुक्त वा आयोग में शिकायत करते-करते पंचायत का कार्यकाल खत्म हो जाता है या फिर जिम्मेदार जन सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत या जनपद पंचायत का ट्रांसफर हो जाता है। उसके बाद भी जानकारी आवेदक को नहीं मिलते। पारदर्शी तरीके विकास कार्य की जानकारी इस माध्यम से आमजन को मिले इस उद्देश्य से बना 2005 यह अधिनियम जनपद पंचायत कार्यालय छुरा में सफेद हाथी सिद्ध हो रहा है।हैरानी की बात यह है कि जनपद पंचायत कार्यालय में सूचना के अधिकार से संबंधित जानकारी प्रदान करने के लिए एक अलग से शाखा और एक कर्मचारी नियुक्त है।बावजूद इसके जवाब नहीं मिलना दुर्भाग्य पूर्ण बात है।
