रायपुर। शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व आज से पूरे देश के साथ छत्तीसगढ़ में भी श्रद्धा और आस्था के साथ प्रारंभ होगी। शक्ति उपासना के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। प्रदेश के प्रमुख देवी मंदिरों में विशेष सजावट की गई है और भक्तों की सुरक्षा व सुविधा हेतु प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना और अखंड ज्योति प्रज्वलित कर मां शैलपुत्री की पूजा होगी। प्रदेशभर में श्रद्धालु मां दुर्गा के दरबार में मत्था टेकने उमड़ेंगे।
- प्रथम दिवस – मां शैलपुत्री
- द्वितीय दिवस – मां ब्रह्मचारिणी
- तृतीय दिवस – मां चंद्रघंटा
- चतुर्थ दिवस – मां कूष्मांडा
- पंचम दिवस – मां स्कंदमाता
- षष्ठम दिवस – मां कात्यायनी
- सप्तम दिवस – मां कालरात्रि
- अष्टम दिवस – मां महागौरी
- नवम दिवस – मां सिद्धिदात्री
छत्तीसगढ़ के प्रमुख देवी मंदिरों में रायपुर का महामाया मंदिर, बिलासपुर रतनपुर महामाया मंदिर, राजनांदगांव का डोंगरगढ़ मां बमलेश्वरी धाम, दुर्ग के मां चंडी मंदिर सोनपुर पाटन के ज्वाला मंदिर, बालोद झलमला गंगा मैया मंदिर, महासमुंद के चंडी मंदिर, जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर, अंबिकापुर के महामाया मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। नवरात्रि के दौरान इन मंदिरों में विशेष अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक आयोजन होंगे। ग्रामीण अंचलों से लेकर नगरों तक भक्ति और उत्सव का वातावरण रहेगा।
प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। मंदिरों व पंडालों में पुलिस बल की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी और यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
धार्मिक मान्यता है कि मां दुर्गा की पूजा से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। अष्टमी और नवमी पर कन्या भोज का आयोजन होगा, वहीं विजयादशमी पर प्रतिमाओं का विसर्जन और रावण दहन के साथ नवरात्रि का समापन होगा।
डिस्क्लेमर : यह समाचार धार्मिक एवं सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित है। इसमें वर्णित आस्थाएं और मान्यताएं जनसाधारण की श्रद्धा पर आधारित हैं। समाचार एजेंसी इन दावों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं करती है।
