एकादश शक्ति, भक्ति की अभिव्यक्ति…एकादशी मानस चिंतन की मोक्षदायिनी यात्रा पर हुआ आनलाइन व्याख्यान माला

 

पाटन। भारतीय पुरातन वैदिक संस्कृति संरक्षण के संघर्षण काल मे वेद ग्रंथों अध्ययन, चिंतन,मनन आधुनिक भौतिकतावादी युग मे विलोपित सा आभाषित हो रहा है। इस स्थिति से रामायण, रामचरित मानस जैसे आर्य संस्कृति , सभ्यता और सामाजिक आध्यात्मिक साहित्य के अध्ययन अध्यापन एवं प्रचार प्रसार के लिए छत्तीसगढ़ राज्य स्तर पर ” मानस दर्शन जीवन अर्पण “आभासी पटल पर लगातार रामचरित मानस की चौपाई, दोहों पर मानस व्याख्याकारों द्वारा चिंतन, व्याख्यान आयोजित किए जा रहे हैं। श्रावण मास मे पच्चीस दिवसीय आनलाइन व्याख्यान माला रात्रिकालीन बेला आयोजन हुआ जिसमें प्रतिदिन सौ से अधिक मानस प्रेमियों की उपस्थिति रहती थी।


इसी पटल पर 19 अगस्त से 24 अगस्त तक एकादशी चिंतन यात्रा आयोजित किए गए ‌ । इसमे अतिविशिष्ट बात रही कि मानस कथा प्रसंग महिला पात्र के चरित्र चित्रण, महिला कथा वक्ताओं और महिला संचालकों द्वारा संपन्न किए गए। प्रतिदिन दिवस दो विदुषी वक्ताओं द्वारा महिला पात्र के चरित्र पर अद्भुत, मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किए जाते रहे हैं। बहन कृतिका कलिहारी कौशिल्या चरित, लेखनी वर्मा अहिल्या चरित,लीना साहू सुमित्रा चरित, सुनीता साहू कैकेई चरित, संगीता निषाद उर्मिला चरित, यशोदा साहू अनुसूईया चरित, पुष्पांजलि सिन्हा सीता चरित, अंजु शर्मा मंदोदरी चरित,आरती साहू स्वयं प्रभा चरित, संतोषी साहू सबरी चरित एवं पुष्पा मिश्रा दीदी जी ने पार्वती चरित पर, अत्यंत सारगर्भित, मार्मिक, प्रसंगानुकूल बहुत भावप्रवण चिंतन विश्लेषण पिरोए। प्रतिदिन कार्यक्रम का संचालन भी नारी शक्तियों ने ही किया इसमे अंजलि गुहा, सविता सोन, वंदना साहू, गंगा वर्मा, आदि।पटल पर श्रोताओं के विचार अभिव्यक्ति से ऐसा लग रहा था कि साक्षात एकादशी नारायणी का प्रकटीकरण हो गया है।
यह एक प्रकार से शक्ति पर्व था। महिला सशक्तिकरण का अनुपम अद्भुत व्यापक शक्ति पर्व मनाए गए। प्रत्येक महिला कथा प्रसंग मे विशिष्ट आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पारिवारिक, सामाजिक संदेश प्रवाहित हो रही थी जो वैक्तिक एवं सामाजिक संशुद्धिकरण के अत्यंत प्रासंगिक है। जैसे – कौशिल्या वात्सल्यमयी माता, अहिल्या मोक्षदायिनी, सुमित्रा भगवत सेवा के पुत्र त्याग, कैकेई बहादुर कुशल राजनयीक जन अपयश के लिए सहनशीलता की मूर्ति, उर्मिला पति तपस्या की सहचरी, अनुसुइया पतिव्रता का प्रतीक, सीता शक्ति संघर्ष कुल कीर्ति , मंदोदरी अत्यंत समझदार स्नेहमयी, स्वयं प्रभा दुसरों की सेवा मोक्ष प्रतीक, शबरी उत्कट भक्ति धैर्य निश्छल की प्रतिमूर्ति।
इस तरह से भारतीय आध्यात्मिक परंपरा मे महिलाओं को शक्ति मानी गई है। उनके अंदर इस ब्रम्हांड को संचालित करने की अद्भुत क्षमता है।
शिक्षा विद छन्नूलाल साहू ने इस एकादशी चिंतन यात्रा पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक प्रकार से परमात्मा के दिव्य स्वरूप को प्राप्त करने या अनुभूति करने का उत्कृष्ट आयोजन है। जिस प्रकार दश इंद्रियों को विभिन्न यौगिक क्रियाओं से संयमित करके समाधिस्थ स्थिति को प्राप्त कर जीव परमात्मा के साथ एकाकार हो जाता है तब भगवान का विराट दिव्य स्वरूप एकादशी के रूप मे जीव दर्शन कर पाते हैं।
मानस दर्शन जीवन अर्पण पटल के संस्थापक आदरणीय दीपक गुहा जी का निरंतर प्रयास है कि इस पटल के माध्यम से जनसामान्य को जोड़कर भारतीय संस्कृति, सभ्यता, साहित्य, वैदिक ग्रंथों अध्ययन से संरक्षण प्रदान करना।

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