आज का युग डिजिटल क्रांति का युग है, जहां सूचना ही क्रांति है- प्रो. पाण्डेय

-द आई सी एफ ए आई विश्वविद्यालय में पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष व्याख्यान कार्यक्रम संम्पन्न।

-विक्रम शाह ठाकुर

कुम्हारी। द आई सी एफ़ ए आई विश्वविद्यालय के सभागार में प्रसिद्ध वैज्ञानिक और भारत के पहले राष्ट्रीय वैज्ञानिक सूचना केंद्र के संस्थापक पद्मश्री डॉ. एस. आर. रंगानाथन की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिन्होंने भारत में आधुनिक पुस्तकालय प्रणाली की नींव रखी। पुस्तकालय दिवस के अवसर पर दिनांक 12 अगस्त 2025 सोमवार को एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के ग्रंथागार विभाग द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि, ग्रंथागार प्रमुख, केन्द्रीय पुस्तकालय, एन.आई.टी रायपुर, डॉ. सुनील कुमार सतपथी, एवं इक्फाई विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो. एस.डी पाण्डेय उपस्थित रहे। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा, कि आज का युग डिजिटल क्रांति का युग है, जहाँ सूचना ही शक्ति है। ऐसे समय में पुस्तकालयों की भूमिका केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वे डिजिटल सूचनाओं के संग्रह, प्रसारण और विश्लेषण के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। हमें आवश्यकता है कि हम अपने पुस्तकालयों को आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित करें ताकि छात्र-छात्राएँ, शोधार्थी एवं शिक्षक नवीनतम जानकारी तक सरलता पूर्वक पहुँच सकें।

कार्यक्रम में प्रो. डॉ. सुनील कुमार सतपथी प्रख्यात पुस्तकालयाध्यक्ष एवं सूचना विज्ञान विशेषज्ञ ने डिजिटल युग में पुस्तकालयों की भूमिका, विषय पर विस्तृत एवं प्रेरणादायक व्याख्यान दिया। उन्होंने पुस्तकालयों के बदलते स्वरूप, डिजिटल संसाधनों की बढ़ती महत्ता और सूचना तकनीक के साथ पुस्तकालयों के एकीकरण की दिशा में उपयोगी जानकारियाँ साझा कीं। उन्होंने कहा कि, वर्तमान समय डिजिटल युग के नाम से जाना जाता है, जहाँ सूचना का प्रवाह तीव्र, व्यापक और बहुआयामी हो गया है। इस युग में पुस्तकालयों की पारंपरिक परिभाषा को नई दिशा मिली है। अब पुस्तकालय केवल किताबों के संग्रह का स्थान नहीं, बल्कि डिजिटल ज्ञान, डेटा विश्लेषण और सूचना-साक्षरता के केंद्र बनते जा रहे हैं।

कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. मनीष उपाध्याय, सभी विभागाध्यक्ष, पुस्तकालयाध्यक्ष, प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थीगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव महोदय ने मंच से सभी अतिथियों, वक्ताओं और सहभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से पुस्तकालयों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है और यह अकादमिक वातावरण को समृद्ध बनाता है।

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