वन अधिकार मान्यता पत्र मिलने से बेदखली के भय से चिंतामुक्त हुए महार सिंग, जमीन समतलीकरण से कृषि कार्य करने में हो रही सहूलियत

काँकेर। जिला मुख्यालय कांकेर से 40 किलोमीटर दूर चारामा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम बडे़गौरी निवासी लघु वनोपज संग्रहण पर आश्रित महार सिंग को व्यक्तिगत वन अधिकार मान्यता पत्र मिलने से उनके जीवन में बदलाव आया है। बेदखली की चिंता से मुक्त होकर वे खेती किसानी में मगन है। उन्होंने बताया कि वन अधिकार से मिली जमीन खेती किसानी लायक नहीं था, लेकिन सरकार द्वारा जमीन का समतलीकरण कराने से अब खेती किसानी करने लायक हो गया है। इस वर्ष उनके द्वारा धान की फसल ली गई है।


कृषक महार सिंग ने बताया कि भूमि समतलीकरण के लिए ग्राम सभा में आवेदन प्रस्तुत किया तथा ग्राम सभा में अनुमोदन के पश्चात् महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत् वन अधिकार मान्यता प्राप्त के जमीन में समतलीकरण किया गया। भूमि समतलीकरण के बाद अब कृषक महार सिंग वर्तमान में धान की फसल ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि धान की अच्छी पैदावार हो रही है, जिससे उनकी माली हालत में सुधार हुआ है। उन्हें विश्वास है कि इस वर्ष भी अच्छी फसल होगी। उन्होंने कहा कि वन अधिकार पट्टा मिलने से वह बहुत खुश हैं, उनका वर्षों पुराना सपना साकार हुआ है। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि काबिज वन भूमि का पट्टा उन्हें मिल गया है। अब वे जमीन की बेदखली से चिंता मुक्त होकर कृषि कार्य कर रहे हैं। वन भूमि का पट्टा उनके लिए वरदान साबित हो रहा है। संवेदनशील मुख्यमंत्री बघेल द्वारा वन भूमि का पट्टा प्रदान करने से उनके परिवार में खुशी का लहर है।

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