सेलूद की बेटियों ने थामी शिक्षा एक्सप्रेस की कमान
शिक्षा एक्सप्रेस ने चुनौती को बदला अवसर में
सोशल डिस्टेंसिंग में चल पड़ी नयी सफल रणनीत
पाटन। कोरोना महामारी के आए दिन बढ़ते चुनौतियों से सभी का जीवन प्रभावित हो रहा है विभिन्न विशेषज्ञों के अनुसार सबसे ज्यादा नुकसान शिक्षा को हो रहा है। जिसमें बच्चे ना स्कूल जा पा रहे हैं और सुविधाओं की कमी के कारण ठीक से पढ़ भी नहीं पा रहे हैं। शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन पढ़ई तुंहर दुआर के अंतर्गत ऑनलाइन कक्षाएं नियमित रूप से संचालित की जा रही हैं किंतु प्राथमिक स्तर में लाभान्वित बच्चों की संख्या कम है क्योंकि हर पालक के पास आधुनिक मोबाइल या डाटा कनेक्शन की सुविधा नहीं है। इस समस्या का समाधान भी शासकीय प्राथमिक शाला के शिक्षक मिलिन्द चन्द्रा ने अपने नवाचार तरीके से कर दिखाया है।
शिक्षक मिलिन्द चन्द्रा द्वारा कुछ सप्ताह पहले सेलूद के ग्रामीण जनों से निवेदन किया गया कि यदि वे अपने बहुमूल्य समय से कुछ घंटे निकाल कर हमारे बच्चों को उनके घर में ही शिक्षा दे पाए तो यह शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य सहयोग साबित होगा जिसमें शिक्षा के प्रति जागरूक गाँव वालों ने अपनी सहमति दी। शिक्षा एक्सप्रेस की यह बोगी एक से दो दो से चार चार से आठ की संख्या में बढ़ते गयी। आज वर्तमान स्थिति में अलग-अलग मोहल्ले में 10 लोग इस शिक्षा एक्सप्रेस की कमान को हाथ में लिए हुए हैं। सेलूद के अधिकांश मुहल्ले में इन वालेंटियर शिक्षकों द्वारा पढ़ाई घर मे ही विगत 15 दिन से करायी जा रही है।

इन वालेंटियर शिक्षक में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरे 10 वॉलिंटियर्स शिक्षक और कोई नहीं बल्कि ग्राम की बेटियां हैं जिन्होंने यह सच कर दिखाया है कि बेटी पड़ेगी भी और पढ़ाई की भी ग्राम की यह बेटियां वॉलिंटियर शिक्षिका के रूप में प्रतिदिन 2 घंटा निकाल कर समीप के बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करते हुए घर मे ही अध्यापन करा रही हैं ।
कोरोनाकाल इतनी जल्दी समाप्त नही होगा हम सभी को इसी माहौल को अवसर में बदलते हुए कार्य करना होगा । शिक्षक मिलिन्द चन्द्रा द्वारा इस अकादमिक वर्ष का कलेंडर बना लिया गया है जिसमे सप्ताह वार छोटे छोटे लक्ष्यों के साथ इस अकादमिक वर्ष में वे बच्चो की प्रगति को आगे बढ़ाएंगे । जिसमे न सिर्फ बच्चो की पढ़ाई अपितु उसका आंकलन भी सम्मिलित है । बच्चो को उनके स्तरानुसार विभिन्न टूल के माध्यम से सीखने सीखाने के क्रम को आगे बढ़ाया जाएगा। वॉलिंटियर शिक्षकों को ऑनलाइन माध्यम से शाला परिवार द्वारा गाइडलाइन प्रदान की जाती है प्रत्येक दिन संस्था प्रमुख द्वारा रणनीति तय करके वालेंटियर शिक्षकों का मार्गदर्शन किया जाता है। इस नवाचार मे योगदान देने वाली इन बेटियों का योगदान अहम रहा है जिसमे प्रीति मानिकपुरी, खिलेश्वरी यादव, गौरी साहू, वैशाली साहू,सोनिया मानिकपुरी,मेनका पटेल,अनिता अनंत,राजेश्वरी पटेल,रेशमा शामिल है।
प्रतिदिन बढ़ रही है लाभान्वितों की संख्याऑनलाइन के माध्यम से सभी बच्चे तक पहुच नही बन पा रही थी किंतु अब सभी बच्चो तक शाला की पहुच बन पा रही है एक एक वालेंटियर के पास औसतन 10 – 10 पढ़ रहे है इस तरह अधिकांश बच्चो तक यह रणनीति सफल साबित हो रही है। बच्चो का उत्साह चरम मेंलम्बे समय तक सहपाठियों और स्कूल से दूर होने के कारण अब बच्चो की पढ़ाई फिर से जोर पकड़ रही है जिसमे बच्चे भी अब लगातार मुहल्ला स्कूल में शामिल हो रहे है।
बच्चो के विचारों को जगह देने के साथ साथ उनकी पसंद का भी ख्याल रखा जाता है जिसमे बच्चो ने स्वदेशी अपनाओ के तर्ज पर हर साल की तरह इस साल भी हस्त निर्मित राखियां बनायी व वितरित की है। विद्यालय की ही भांति प्रतिदिन प्रार्थना के साथ बच्चो की पढ़ाई आरम्भ होती है तथा प्रत्येक शनिवार रविवार को कला कौशल का निखार किया जाता है जिसमे कागज के खिलौने व मास्क भी बनाना बच्चो ने सीख लिया है।
इन्होंने अलग-अलग विधाओं से शिक्षा को चालू रखा है । बच्चों में शिक्षा फिर से शुरू होने से काफी उत्साह व जुनून देखने को मिला है जिसमें औसतन प्रत्येक वॉलिंटियर शिक्षक के पास 10-10 बच्चे उपस्थित हो रहे हैं जिसमें शाला एवं समुदाय ने हर्ष व्याप्त किया है यहा न सिर्फ शासकीय प्राथमिक शाला सेलूद के बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं अपितु अन्य निजी विद्यालयों के बच्चे को भी शिक्षक मिलिन्द चन्द्रा द्वारा पढ़ने के अवसर वालंटियर शिक्षक के माध्यम से प्रदान किया जा रहा है । बच्चो की रुचि का रखा जाता है ख्याल ताकि बच्चे नियमित रहे इसलिए शनिवार एवं रविवार को विभिन्न कलात्मक कौशल के गुण भी सिखाए जाते हैं बीते सप्ताह बच्चों को कागज से बने खिलौने तथा मास्क बनाना सिखाया गया।
ग्रामीण जनों ने इस प्रकार मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग द्वारा बच्चो की पढ़ाई निरंतर चलते रहने पर हर्ष जताया है शाला परिवार से वीरेंद्र चंद्राकर, रूपा देवांगन,शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र बंछोर, संकुल समन्वयक संतोष चंद्राकर, ग्राम सरपंच खेमिन खेमलाल साहू, पूर्व जिला पंचायत सदस्य जयश्री वर्मा ने भी शिक्षक मिलिन्द चन्द्रा की योजना को सराहा व आगे बढ़ाने की बात कही है जिसमे समुदाय ने बेटियों के इस जिम्मेदारी की सराहना करते हुए कहा कि अन्य विद्यालयों के लिए यह एक प्रेरणा का स्रोत है सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए इसी तरह मुहल्ला क्लास शुरू होनी चाहिए।
