भिलाई। सीएसव्हीटीयू के गोपनीय दस्तावेजों की चोरी व उसे सोशल मीडिया में प्रसारित कर बुरे फंसे विश्वविद्यालय के पूर्व कर्मचारी ओपी मिश्रा, अग्रिम जमानत याचिका हुई खारिज।सीएसव्हीटीयू भिलाई की ओर से अपर लोक अभियोजक द्वारा अभियुक्त ओपी मिश्रा द्वारा लगाए गए अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए अभियुक्त के विरुद्ध गंभीर प्रकृति का आरोप बताया गया और उक्त अग्रिम जमानत आवेदन को निरस्त किये जाने का निवेदन किया गया।जिसपर न्यायमूर्ति प्रशांत पराशर, द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश,दुर्ग द्वारा प्रकरण के तथ्यों का अवलोकन कर याचिका निरस्त करते हुए उल्लेख किया गया कि इसमें आवेदक/अभियुक्त के संबंध में पुलिस द्वारा विभिन्न साक्ष्य एकत्रित किये जा रहे हैं और प्रथम दृष्टतयाः उपरोक्त प्रक्रिया से इस प्रकरण में इस तरह के तथ्य एवं परिस्थिति दर्शित नहीं है जो कि अभियुक्त ओमप्रकाश मिश्रा को अग्रिम जमानत दिये जाने योग्य बनाती है, इसलिये उपरोक्त सभी तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुये अभियुक्त ओमप्रकाश मिश्रा की ओर से प्रस्तुत अग्रिम जमानत आवेदन अंतर्गत धारा 482 भा.ना.सु.सं. निरस्त किया जाता है।इसी के साथ सूत्रों के हवाले खबर है कि सीएसव्हीटीयू द्वारा गोपनीय दस्तावेजों की चोरी व उसे सोशल मीडिया में अनाधिकृत प्रसार करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद से ही ओमप्रकाश मिश्रा उर्फ ओपी मिश्रा व उनके बेटे जो अपने सोशलमीडिया में सभी दस्तावेजों को वायरल किया करते थे दोनों चल रहे फरार। वहीं सीएसव्हीटीयू में कार्यरत रहते हुए ओपी मिश्रा द्वारा अपने महिला सहकर्मी से किए गए अभद्रता और महिला प्रताड़ना के प्रकरण पर छत्तीसगढ़ महिला आयोग की ओर से निराकरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है विदित हो कि मान. राज्यपाल एवं कुलाधिपति द्वारा गठित जांच समिति ने ओपी मिश्रा को अभद्रता व महिला प्रताड़ना के आरोप में दोषी पाया था अब दोनों प्रकरण पर दुर्ग पुलिस अभियुक्त ओमप्रकाश मिश्रा को कभी भी कर सकती है गिरफ्तार।
CSVTU में दस्तावेज चोरी व महिला प्रताड़ना के आरोपी ओपी मिश्रा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी
