राजनांदगांव जिला धान के खेती के लिए जाना जाता है। यह वर्षा आधारित क्षेत्र है लेकिन कुछ साल से सूखा का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, धान के साथ-साथ कुछ किसान खरीफ मौसम मे सब्जियों की खेती भी करते हैं, ताकि पानी की कमी के कारण धान असफल हो जाए तो वह आय की प्राप्ति सब्जियों द्वारा कर सके। लेकिन कई किसान आधुनिक खेती की नवीनतम तकनीकों से भी परिचित नहीं हैं; फलस्वरूप किसान को उतना लाभ नहीं मिल पाता, जितना उसे मिलना चाहिए।
पीताम्बर लाल साहू राजनांदगांव जिले के डोंगरगाँव ब्लॉक के गाँव खपरी कला का निवासी है। उनके परिवार में 5 सदस्य हैं जिसमें उनकी मां, पत्नी और 2 बेटे शामिल हैं। उन्होंने 12 वीं तक पढ़ाई की है। उसके पास 2 डिसमिल किचन गार्डन और 5 एकड़ ज़मीन है जिसमें वह अपने पैतृक स्थान, खपरीकला में धान की खेती करता है। कोविड-19 लॉकडाउन के कारण उसके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी और वह अपने परिवार में अकेला कमाने वाला है। उनके परिवार की आय का स्रोत केवल खेती है और अगर सूखा पड़ता तो उनकी स्थिति और बिगड़ सकती थी।
पीताम्बर लाल साहू को पड़ोसी किसानों के माध्यम से रिलायंस फाउंडेशन सूचना सेवाओं के बारे में पता चला। उन्होंने रिलायंस फाउंडेशन के मल्टी लोकेशन औडियो कॉन्फ्रेंस कार्यक्रम में भी भाग लिया। पीताम्बर साहू पहले पारंपरिक विधि से खेती करते थे और बहुत सारी समस्यों से सामना करना पड़ता था उन्हे मृदा परीक्षण के महत्व, बीज चयन, बीज उपचार, उर्वरक प्रबंधन और रोग व कीट नियंत्रण जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में जानकारी का अभाव था जिसके कारण उनके गोभी की फसल मे गलन की समस्या का सामना करना पड़ा ।
उन्होंने 7 मई 2020 को रिलायंस फाउंडेशन द्वारा मल्टी लोकेशन आडिओ कॉन्फ्रेंस कार्यक्रम में भाग लिया। जिसमें एकीकृत कीट और रोग प्रबंधन पर चर्चा की गई और कोविड-19 के लिए सावधानियों पर भी चर्चा की गई। उसमें, हमें यह भी बताया गया कि इस लॉकडाउन अवधि के दौरान बेहतर कमाई कैसे करें। उनकी फूलगोभी की फसल में गलन रोग हो रहा था। उन्होंने रिलायंस फाउंडेशन के विशेषज्ञों की सलाह से इसे नियंत्रित किया। उन्होंने रसायनों के प्रयोग की सही विधि और मात्रा की जानकारी प्राप्त की। डॉ॰ बी.एस. राजपूत, (वरिष्ठ वैज्ञानिक और विभाग प्रमुख) कृषि विज्ञान केंद्र, सुरगी , राजनांदगांव ने उन्हें बावस्टिन पफूंदनाशक का प्रयोग करने की सलाह दी जिससे उनकी फसल बहुत जल्द स्वस्थ हो गई। उन्होंने अपने 2 डिसमिल से 2.7 क्विंटल फूलगोभी की फसल ली।
पहले वह सब्जियां घरेलू इस्तेमाल के लिए उगाया करते थे।, लेकिन रिलायंस फाउंडेशन से ज्ञान प्राप्त करने के बाद उन्होंने व्यावसायिक स्तर पर शुरू कर दिया, ताकि वे कमा सकें। इससे पहले कि वह अपने बाड़ी से शून्य लाभ प्राप्त किया करते थे। , लेकिन सलाह के बाद कुल लाभ ₹8100/- जो कि शून्य की तुलना में बहुत बड़ी राशि है।
2 डिसमिल में खेती की लागत ₹2200/- थी, 2.7 क्विंटल फूलगोभी बेचने के बाद उन्होंने ₹8100/- कमाया कुल लाभ ₹5900/- रिलायंस फाउंडेशन और कृषि विज्ञान केंद्र सुरगी के सलाह के कारण वह बहुत बड़े नुकसान से बच गया। लॉकडाउन अवधि के दौरान वैज्ञानिक सलाह अमूल्य हैं। चूंकि खेती आय का एकमात्र स्रोत है, इसलिए प्राप्त किए गए सभी धन का उपयोग घरेलू खर्चों में किया जा रहा है।
इसके अलावा जब भी आवश्यकता होती है, वह रिलायंस फाउंडेशन के टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से रिलायंस फाउंडेशन के विशेषज्ञों से सलाह लेते है रिलायंस फाउंडेशन की सूचना सेवाओं से उन्हें खेती की वैज्ञानिक तकनीकों से अवगत कराने में मदद की।
पीताम्बर लाल साहू रिलायंस फाउंडेशन के सभी जानकारी और सलाह के लिए आभारी हैं जिन्होंने उन्हें सही समय पर उचित ज्ञान प्रदान किया। रिलायंस फाउंडेशन ने एक मल्टी लोकेशन आडिओ कॉन्फ्रेंस के माध्यम से किसानों के दरवाजे पर वैज्ञानिक तकनीक लाया है, जो इस कोरोना समय में एक बड़ी पहल है। पीताम्बर लाल साहू का कहना है कि किसानों को रिलायंस फाउंडेशन के टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-419-8800 की सेवाओं का उपयोग करना चाहिए और कम खर्च के साथ अधिक कमाई करनी चाहिए।
