लोकेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट
गरियाबंद—– जिला प्रशासन की एक ओर प्रभारी मंत्री ने कुछ दिन पूर्व जमकर क्लास लेने के बाद फिर वही ढर्रे पर प्रशासन की रवैया सामने आया है। सरकार की कथनी और करनी की अगर बात करें तो जिला गरियाबंद में भ्रष्टाचार चरम सीमा में है। विकास खंड छुरा ग्राम पंचायत फूलझर में मनरेगा कार्य गोल्डानाला मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण के लिए जिला प्रशासन गरियाबंद के द्वारा 09/06/2020 के प्रशासकीय स्वीकृति आदेश में राशि 07.03 लाख मजदूरी भुगतान और राशि 07.88 लाख रुपये सामाग्री के लिए कुल राशि 14.92 लाख जारी किया गया है। मगर खास बात यह है कि इस कार्य के लिए भरी बरसात में एक ओर जहाँ 15 जून से मिट्टी, मूरुम और रेत का खोदाई पूर्ण प्रतिबंधित होने के बाद भी तौरेंगा बाँध में जेसीबी मशीन से खोदाई कर मुरुम परिवहन कराया गया फिर उसे लगभग एक किलोमीटर की दूरी तक मुरुम को बिना मजदूर के बिना मस्टररोल निकाले जेसीबी मशीन से बिछाया गया है। जबकि ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, मनरेगा तकनीकी सहायक की सहमति से जेसीबी मशीन के माध्यम से मुरुम खोदा गया और उन्हीं के निगरानी में जेसीबी मशीन से मुरुम बिछाया गया। जिला और जनपद पंचायत छुरा के मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी ने गोल्डानाला का मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य बगैर डीपीआर तैयार किये, बिना वर्क कोड और बगैर जीओ टेकिंग बगैर मजदूरों के मस्टरोल निकले सामाग्री परिवहन कराया जाना वह भी 15 जून से 15 अक्टूबर तक एनजीटी के सख्त निर्देश जारी होने के बाद भी प्रतिबंधित क्षेत्र गोलडानाला बांध से मुरुम खोदाई कराई गई है । जिसमें कार्य की लीपापोती और कमीशन खोरी स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहा है।
प्रीतम सिन्हा भाजपा नेता का कहना है कि…..
मनरेगा कार्य में सरपंच, सचिव तकनीकी सहायक और सप्लायर की मनमर्जी,
प्रतिबंधित क्षेत्र में जेसीबी मशीन से गोलडानाला बाँध से मुरुम खोदकर परिवहन कर स्वीकृत कार्य का बगैर डीपीआर, बगैर वर्क कोड और बगैर जीओ टेकिंग के सामाग्री परिवहन कराया गया…
वर्तमान में बिना मस्टररोल बिना मजदूरों के बिछाया गया मुरुम…
सरकार की निर्देशों को अंगूठा दिखा कर मनरेगा में स्वीकृत कार्य को जेसीबी मशीन से कराना मजदूरों का शोषण है, जिला प्रशासन मनरेगा कानून तोड़ने वाले के खिलाफ मामला दर्ज कर मनरेगा मजदूरों को न्याय दिलायें–
