कोरोना काल मे स्कूल बंद होने पर तेलीगुंडरा की युवती ने घर मे बच्चों को निशुल्क शिक्षा देकर की एक नई पहल की शुरुवात

किशन हिरवानी….

पाटन। जुलाई का महीना नई कक्षा, नई किताब-कॉपियों की खुशबू के साथ नए बस्ते, यूनिफॉर्म और जूतों की रंगत और कुछ नए चेहरों से दोस्ती का मौसम होता है।  मौसम का मिज़ाज कुछ ऐसा हुआ करता है कि सालों पहले पढ़ाई खत्म कर चुकने वालों को भी इन दिनों स्कूल से जुडी यादें  रह-रह कर सताता है। लेकिन 2020 किसी भी और चीज से ज्यादा कोरोना वायरस का साल है, इसका असर गुजरे कई महीनों की तरह जुलाई पर भी है। अब जब जुलाई का दूसरा पखवाड़ा बीत चुका है और स्कूल बंद है।
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित ना हो इसके लिये राज्य सरकार द्वारा ऑनलाइन शिक्षा पढ़ाई तुंहर दुवार की व्यवस्था की गई है। लेकिन गावों में नेटवर्क की समस्या के कारण कई छात्र छात्राएं ऑनलाइन शिक्षा से वंचित है। सरकारी स्कूलों के बच्चों के पढ़ाई में निरंतरता रखने के लिये पाटन ब्लॉक के ग्राम तेलीगुंडरा की सुश्री खेमा साहू जो इस साल Msc की पढ़ाई पूरी की है उनके द्वारा नई पहल की जा रही है। सरकारी स्कूलों के बच्चों को घर पर पढ़ा रही है।खेमा साहू ने बच्चों को पढ़ाने की शुरुवात अपने घर के छोटे बच्चों से की उसके बाद अपने मोहल्ले के बच्चों को भी निशुल्क पढ़ा रही है।

आज सुश्री खेमा साहू ने News24carate.com से चर्चा करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर बच्चे शासकीय स्कूल में पढ़ाई करते है। पैसों की कमी के कारण पालक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में नही पढ़ा सकते है। ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश बच्चे शासकीय स्कूल में भी पढ़ाई करते है। शासकीय स्कूलों में भी अब सरकार द्वारा सुविधाएं दी जा रही है। जिसके कारण शासकीय स्कूलों कर बच्चे भी हर क्षेत्र में आगे आ रहे है। जरूरत है तो पलको को बच्चों के ऊपर ध्यान देने की आवश्यकता होती है। गांव में  ज्यादातर प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चो के पास एंड्राइड फोन नहीं होता। बच्चा शिक्षा से दूर न हो इसके लिए मैंने एक  पहल की है। अभी मोहल्ले के कक्षा 6 से 10 तक के 12 छात्र छात्राएं पढ़ाई करने आ रहे है।

पालकों को ऑनलाइन पढ़ाई करवाने में अड़चन होती है
सुश्री खेमा साहू का कहना है कि गांव में ज्यादातर अभिभावक ऑनलाइन पढ़ाई करवाने ने अड़चन महसूस करते हैं क्योंकि एक तो वे खुद इतने पढ़े-लिखे नहीं है कि रेडियो-टीवी पर आने वाली बातों को समझकर, अपने बच्चों को समझा सकें। दूसरे इस समय उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि एंड्रॉयड  फोन-इंटरनेट का खर्चा उठाते रह सकें। और फिर पूरे दिन वे अपना बचा-खुचा काम-धंधा देखें कि अपने बच्चों के आगे-पीछे घूमें। इन सब बातों को गौर करते हुए ग्राम तेलीगुंडरा की सुश्री खेमा साहू ने बच्चो को घर पर सोशल डिस्टेंसिंग व अन्य नियमों का पालन करते हुए निशुल्क पढ़ाई करवा रही है। इसके लिये  तेलीगुंडरा की प्रधानपाठिका उर्वशी देशमुख एवं शिक्षक जैनेंद्र गंजीर द्वारा उन्हें सतत मार्गदर्शन दे रहे है।
बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी
जैनेंद्र गंजीर ने बताया कि कोरोना महामारी से बचते हुए बच्चों को उनका अधिकार दिलाने के लिये प्रयास जारी हैं। गुरुजन खुद को सुरक्षित रखते हुए बच्चों को भी महामारी से सुरक्षित रख रहे हैं। उन्हें यथा आवश्यक शिक्षित कर रहे हैं। खेमा साहू का यह  कदम बच्चों की मुस्कान, के साथ पढ़ाई में निरंतरता बनाये रखने में  पहचान के लिये चलाया जा रहा है। 
पिताजी और परिवार से मिलती है प्रेरणा
खेमा साहू ने बतलाया कि उनके पिताजी दिनेश साहू(उपाध्यक्ष तहसील साहू संघ पाटन) को बचपन से सामाजिक गतिविधियों में सक्रियता के साथ काम करते हुए देख रही हूं जिसके कारण मुझे भी समुदाय के लिये कुछ करने का मन होते रहता है। बच्चों को लॉकडाउन के दौरान उनकी पढ़ाई में निरंतरता बनाये रखने के लिये जो प्रयास चल रहा है उसमें पूरे परिवार का सहयोग मिल रहा है। खेमा साहू के इस प्रयास से पिछड़े पाठ्यक्रम में भी निरन्तरता बनी रहेगी, बच्चे जो स्कूल नही खुलने से खेल कूद में मन लगा रहे है। उनमें भी खेमा के पढ़ाने से उनकी भी रुचि पढ़ाई की ओर होगी ।इस तरह के उच्च शिक्षित लोगो को स्थानीय शिक्षक एव पंचायत प्रतिनिधियों को प्रेरित करना चाहिए

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