माता निरई के दर्शन को पहुंचे लाखो श्रद्धालु,,,,,,,,,,,,,,साल में एक बार नवरात्र के प्रथम रविवार को खुलता है। माता का दरबार,,,,,,,महिलाओं का।आना सक्त वर्जित है यहां

खबर हेमंत तिवारी

पांडुका /गरियाबंद जिला और धमतरी जिले के मध्य में स्थित मां निरई का धाम वर्ष में एक बार चैत्र नवरात्र के प्रथम रविवार को खुलता है या कहा जाए यहां यात्रा के रूप में लोग माता के दर्शन करने पहुंचते हैं।यह मान्यता है कि यह कई सालों से ऐसे ही चला आ रहा है जिसमें हर साल दर्शनर्थियों के भीड़ भारी देखने को मिल रही है बता दे की 21 बहनों में बड़ी बहन मां निरई है।जो स्वेत रंग प्रिय जहा पर लाल रंग वर्जित है।माता की महिमा अपरंपार है सात समुंदर पार से भी लोग इस दिन माता के दर्शन करने पहुंचते हैं और सालो से इस दिन इंतजार करते है जिले सहित अन्य राज्य के लोग भारी संख्या में पहुंचते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने पर यथा शक्ति भेंट चढ़ते हैं इस दिन यह माता का दरबार सुबह 5 बजे से लेकर शाम के होने तक खुला रहता है जिस कारण लोग सुबह से शाम तक पहाड़ों में।दर्शन को पहुंचते हैं इसके बाद फिर एक वर्ष के लिए यहां आना बंद रहता है।खास कर यहां महिलाओं आना वा दर्शन करना पूर्ण रूप से वर्जित है केवल पुरुष ही यहां दर्शन करने पहुंचते हैं जो यथाशक्ति अपने चढ़ावा लेकर पहुंचते हैं जानकार बताते थे कि पहले माता निरई स्वयं अपने पुजारी से पूजा की थाल को स्वयं हाथों से स्वीकार करते थे पर अब कलयुग के प्रभाव के कारण पट बंद हो रहा है।और आज की स्थिति को देखते हुए धीरे-धीरे यह परंपरा रिवाज भी बदल गया है ।

और माता का जो पट है जो पहले की अपेक्षा अब धीरे-धीरे बंद होने लगा हर एक समय में ऐसा लगता है कि यह पट पूरी तरह बंद हो जाएगा पर माता कि महिमा हमेशा कायम रहेगा।माता का प्रसाद लेकर सुबह से पैदल पहाड़ों पर चढ़ते हैं कोई दौड़ते हुए चढ़ते हैं तो कोई पैदल चढ़ते हैं बच्चे से लेकर बड़ों तक इस दिन अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं और नारियल पूजा पाठ की सामग्री चढ़ाते हैं जिसमें गुलाल अगरबत्ती पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहता है हजारों लाखों की संख्या में लोग नंगे पांव कई किलोमीटर तक पैदल चलते हैं और सुबह से ही पैदल यात्रियों की आवा जाहि चालू हो जाती है खासकर संतान प्राप्ति की मनोकामनाओं को लेकर लोग ज्यादा पहुंचते हैं जानकार बताते हैं कि आज भी माता रानी की अलौकिक दिव्य ज्योति बिना तेल बिना बाती के दिन रात जलते रहते हैं और किस्मत वाले को ही इसका दर्शन होता है कई जानकारी तो ऐसे हैं ।जी माता की कई किस्से कहानी भी बताते हैं उसको सुनकर लगता है कि आज भी श्रद्धालु माता के पास सच्चे मन से मनोकामना मांगते हैं तो माता उसकी मुरादे पूरी कर देती है । और भक्तों की सारी दुख तकलीफ दूर करने वाली माता निरई ग्राम पंचायत मोहेरा के पहाड़ी में विराजमान है दिन व दिन माता निराई के दर्शन को भक्तो को संख्या बढ़ते जा रहे हैं। जो इस साल पिछले साल से दुगुना था ।और आम जन को कोई दिक्कत ना हो इसलिए स्थानीय समिति द्वारा व्यवस्था भी सुचारू रूप से संचालित किया जा रहा है।

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