डॉ शालिनी यादव की *स्त्री*पर एक सुंदर रचना,””स्पेस बनाती स्त्री””
“स्पेस” बनाती स्त्री देशकाल,समाज,अथवा परिवाररहते हैं सबएक तरफमुन्तजिर चाहत मेंस्त्री के साथ कीहर कदम पर बांधकरअपने स्वार्थ हेतुएक बंधन में.. कृत्रिम हैं सबसमाज,व्यक्ति विशेषऔर परिवार...
