Homeअन्यनिर्मलकर समाज की महिलाओं ने फूलों और रंगों से रंग पंचमी मनाई

निर्मलकर समाज की महिलाओं ने फूलों और रंगों से रंग पंचमी मनाई

* *छुरा@@@@* रंग पंचमी का पर्व बड़े हर्षोल्लास व धूमधाम के साथ निर्मलकर समाज भवन मड़ेली एवं निर्मलकर समाज भवन गरियाबंद मनाया गया है। इसी के तहत निर्मलकर समाज भवन में राधा कृष्ण की छायाचित्र में फूल एवं रंग गुलाल अर्पित कर महिला मंडल के द्वारा रंग पंचमी का पर्व हर्षोल्लास व धूमधाम के साथ मनाया गया। महिला मंडल के अध्यक्ष श्री मति उत्तरा निर्मलकर ने बताया कि प्रतिवर्ष इस पर्व को हम सभी महिलाएं पंचमी के अवसर पर प्रातः 11:00 बजे समाज भवन में सभी महिलाएं एकत्रित होते हैं और राधा कृष्ण के भजन कीर्तन के साथ यहां पर अनोखे अंदाज में फूलों और रंगों से होली खेली जाती है। इस दिन वातावरण में उड़ते हुए गुलाब से व्यक्ति के सात्त्विक गुणों में अभिवृद्धि होती है। उसके तामसिक और राजसिक गुणों का नाश हो जाता है। इसलिए इस दिन शरीर पर रंग न लगाकर वातावरण में रंग बिखेरा जाता है। ये त्योहार आपसी प्रेम और सौहार्द का प्रतीक माना गया है। इस पर्व को प्रतिवर्ष महिलाएं धूमधाम के साथ आयोजन करती हैं। होली के 5 दिनों के बाद इस पर्व को आयोजित किया जाता है। उपाध्यक्ष लता निर्मलकर बताया कि माना जाता है कि रंगपंचमी के दिन भगवान श्री कृष्ण ने राधा के साथ होली खेली थी, इसलिए रंग पंचमी के दिन श्री कृष्ण के साथ राधा रानी की भी पूजा की जाती है। इसलिए इस दिन श्री कृष्ण और राधा रानी को रंग अर्पित किए जाने की परंपरा है। निर्मलकर समाज की महिलाओं ने रविवार को धूमधाम के साथ में फूलों और रंगों से रंग पंचमी का पर्व मनाया ।महिलाओं का यह मानना है कि गांव, शहर सहित जिले में सुख समृद्धि शांति को लेकर हमारे द्वारा प्रतिवर्ष रंग पंचमी पर एक दूसरे को रंग लगाकर भजन कीर्तन कर इस पर्व को बड़े हर्ष उल्लास से मनाया गया। आयोजन दोपहर 3:00 बजे तक चला जहां पर महिलाओं ने कार्यक्रम के समापन के दौरान सभी महिलाओं को प्रसादी का वितरण किया। इस दौरान विन्द्रानवागढ़ परिक्षेत्र पदाधिकारी- संरक्षक केसर निर्मलकर, अध्यक्ष ईश्वर निर्मलकर, उपाध्यक्ष पुरानिक निर्मलकर, सचिव ‌खामसिंग, सहसचिव योगेन्द्र, सलाहकार नारायण निर्मलकर, मनहरण निर्मलकर,मुरहा राम,मोहन निर्मलकर, अंकेक्षक माधव निर्मलकर, मिडिया प्रभारी तेजराम निर्मलकर , महिला मंडल सचिव पुष्पा बाई, सदस्य- सकुंतला, चमेली,कुन्ती बाई, रामप्यारी, संतोषी,‌बुधन्तीन ,सुकंन्तीन बाई,घुरुवा बाई, एवं अधिक संख्या में समाज के महिला पुरुष उपस्थित रहे।

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