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काले मोतियों के नाम पर करोड़ों की ठगी:9 हजार से अधिक महिलाओं से सवा दो करोड़ की ठगी, कंपनी दफ्तर बंद कर भागी

दुर्ग. दुर्ग में एक नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी ने काली मोतियों की माला बनाने के बिजनेस के नाम पर 9 हजार से अधिक महिलाओं से सवा दो करोड़ रुपए की ठगी की है। नेटवर्क कंपनी संचालक द्वारा कार्यालय में ताला लगाकर भाग जाने के बाद महिलाओं ने इसकी शिकायत कोतवाली थाने में की। महिलाओं और उनके परिजनों ने इसके विरोध में गुरुवार को जमकर हंगामा किया। इस दौरान उन्होंने कार्यालय में पथराव भी किया। पुलिस मामला दर्ज कर मामले की जांच कर रही है। जानकारी के मुताबिक दुर्ग में नवंबर 2022 में होमग्राउंड कार्पोरेशन नाम की कंपनी ने दो महिने पहले अपना एक ऑफिस इंदिरा मार्केट में खोला था। इस कंपनी का दावा था कि वो काले मोतियों की माला और पतंग का बिजनेस करने आई है। इसमें जो महिलाएं जुड़ेंगी उन्हें मुनाफा होगा। कंपनी के डायरेक्टर सानू कुमार ने महिलाओं से वादा किया था कि वो 2500 रुपए जमा करके अपना रजिस्ट्रेशन कराएं। उसके एवज में वो उन्हें काले मोती और पतंग बनाने का मटेरियल देंगे। यदि 15 दिन के अंदर वो सामान बनाकर जमा करेंगी तो उन्हें उसके एवज में 3500 रुपए मुनाफा दिया जाएगा। साथ ही उनकी सिक्योरिटी मनी 2500 रुपए उसी तरह जमा रहेगी।

इस तरह 9 हजार महिलाओं को दिया धोखा
कंपनी के डायरेक्टर सानू कुमार ने महिलाओं को यह भी लालच दिया था कि एक महिला सदस्य लाने पर उन्हें 400 रुपए का बोनस दिया जाएगा। इससे दो महीने के अंदर 9 हजार महिलाएं इस बिजनेस से जुड़ गईं। 19 जनवरी की सुबह जब महिलाएं जब अपने द्वारा बनाया गया प्रोडक्ट लेकर कंपनी के कार्यालय पहुंची तो वहां ताला लगा था। फोन लगाने पर वह बंद आया। इससे वहां हड़कंप मच गया। धीरे-धीरे यहां एक हजार से अधिक महिलाएं और उनके परिजन पहुंचे और उन्होंने जमकर हंगामा किया और कंपनी कार्यालय में पथराव भी किया।
कोतवाली पुलिस ने दर्ज किया मामला
सभी महिलाओं ने कंपनी में काम करने वाले दुर्ग के लोगों को पकड़ा। इस पर उन्होंने भी कंपनी डायरेक्टर के बारे में कोई भी जानकारी होने से मना किया। इसके बाद सभी लोग दुर्ग कोतवाली थाने पहुंचे और कंपनी डायरेक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है।
दुर्ग निगम ने जारी किया था गुमास्ता
इस पूरे मामले में दुर्ग नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आई है। उन्होंने कंपनी के संचालक के बारे में बिना कोई जांच किए या जानकारी लिए कंपनी को गुमास्ता लाइसेंस भी जारी कर दिया। इसलिए पुलिस यह भी जांच करेगी की उसे गुमास्ता लाइसेंस किन दस्तावेजों के आधार पर जारी किया गया।

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