Homeशिक्षानिःशुल्क योग एवम जन जागरूकता शिविर में योगाचार्य शंकर यदु बोले,सदाचार,संयम सीख...

निःशुल्क योग एवम जन जागरूकता शिविर में योगाचार्य शंकर यदु बोले,सदाचार,संयम सीख ही योग है,

खबर हेमंत तिवारी


छुरा :- प्रकृति की अनुपम गोद में सुरम्य वादियों के बीच प्राचीन शिव मंदिर हरदी प्रांगण पर नि:शुल्क योग एवं जन जागरूकता शिविर आयोजित है। जिले के ख्यातिलब्ध योगाचार्य शंकर लाल यदु, देवनारायण यदु, जागेश्वर ध्रुव एवं अर्जुन धनंजय सिन्हा द्वारा योग सिखाया जा रहा है। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर सूर्योदय के समय बीज मंत्रों की स्तुति के साथ सूर्य नमस्कार किया गया। जागेश्वर ध्रुव द्वारा देशभक्ति गीतों के साथ यौगिक जॉगिंग का अभ्यास कराया गया। शंकर यदु ने वैदिक मंत्रों के साथ ॐ का ध्यान, उदगीत एवं प्रणव प्राणायाम कराया। यदु ने पूर्ण नियंत्रण द्वारा स्थूल एवं सूक्ष्म व्यायाम को सिखाया।देवनारायण यदु ने अष्टांग योग की अवधारणा को सिखाया। बैठकर किए जाने वाले आसनों को भी बताया। योगविद् अर्जुन धनंजय सिन्हा ने वैदिक मंत्रों के साथ सूर्य नमस्कार का अभ्यास कराया। मकर संक्रांति की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दिन भगवान सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध से उत्तरी गोलार्द्घ में प्रवेश करते हैं। उत्तर दिशा की ओर आगे बढ़ते हैं। इस विशेष दिन से मौसम परिवर्तन की शुरुआत होने लगती है। सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। यह संक्रमण प्रतिवर्ष लगभग 20 मिनट विलंब से होता है। स्थूल गणना के आधार पर तीन वर्ष में एक घंटे और 72 वर्ष में एक दिन का हो जाता है। मकर संक्रांति को उत्तर में खिचड़ी, दक्षिण में पोंगल, पंजाब में लोहड़ी, असम में बीहू भी कहते हैं। इस दिन तिल गुड़ के दान का विशेष महत्व बताया गया है। सूर्य नमस्कार कराते हुए कहा कि यह यौगिक व्यायामों में सर्वश्रेष्ठ है। यह सात आसनों को बारह के व्यवस्थित क्रम में किया जाता है। फेफड़ों के अंदर शुद्ध प्राण वायु का प्रचुर मात्रा में संचार होने के कारण शरीर सूर्य के समान कांतिवान बनता है। भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम विलोम, भ्रामरी प्राणायाम को बारीकियों से सिखाते हुए उनके लाभ एवं सावधानियों को बताया। शिविर में व्यवस्थित दिनचर्या का भी पाठ सिखा रहे हैं। शिविरार्थियो को योग के साथ-साथ स्वावलंबन, भारतीय संस्कृति, सदाचार एवं नैतिक शिक्षा भी प्रदान कर रहे हैं। योगविद् अर्जुन धनंजय सिन्हा प्रतिदिन भारतीय परम्परा अनुरूप वेशभूषा में साइकिल से दरी, माइक पकड़ कर शिविर स्थल पहुंचते हैं। शिविर के आयोजन में ऊर्जावान सरपंच संतुराम ध्रुव, प्रधान पाठक दीपक तिवारी तन-मन-धन से सहयोग कर योग से लाभान्वित हो रहे हैं। गांव के नूतन महाराज, जीवन, पुजेरीन दाई, हरि, साधना, पेखज़, कृतिका, रुचि, भोजराज, चेलेश्वरी, विद्या, मानसी, गोविंद प्रतिदिन योग की बारीकियां सीख रहे हैं।

खबर हेमंत तिवारीसदाचार, संयम सीख ही योग – *शंकर*छुरा :- प्रकृति की अनुपम गोद में सुरम्य वादियों के बीच प्राचीन शिव मंदिर हरदी प्रांगण पर नि:शुल्क योग एवं जन जागरूकता शिविर आयोजित है। जिले के ख्यातिलब्ध योगाचार्य शंकर लाल यदु, देवनारायण यदु, जागेश्वर ध्रुव एवं अर्जुन धनंजय सिन्हा द्वारा योग सिखाया जा रहा है। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर सूर्योदय के समय बीज मंत्रों की स्तुति के साथ सूर्य नमस्कार किया गया। जागेश्वर ध्रुव द्वारा देशभक्ति गीतों के साथ यौगिक जॉगिंग का अभ्यास कराया गया। शंकर यदु ने वैदिक मंत्रों के साथ ॐ का ध्यान, उदगीत एवं प्रणव प्राणायाम कराया। यदु ने पूर्ण नियंत्रण द्वारा स्थूल एवं सूक्ष्म व्यायाम को सिखाया।देवनारायण यदु ने अष्टांग योग की अवधारणा को सिखाया। बैठकर किए जाने वाले आसनों को भी बताया। योगविद् अर्जुन धनंजय सिन्हा ने वैदिक मंत्रों के साथ सूर्य नमस्कार का अभ्यास कराया। मकर संक्रांति की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दिन भगवान सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध से उत्तरी गोलार्द्घ में प्रवेश करते हैं। उत्तर दिशा की ओर आगे बढ़ते हैं। इस विशेष दिन से मौसम परिवर्तन की शुरुआत होने लगती है। सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। यह संक्रमण प्रतिवर्ष लगभग 20 मिनट विलंब से होता है। स्थूल गणना के आधार पर तीन वर्ष में एक घंटे और 72 वर्ष में एक दिन का हो जाता है। मकर संक्रांति को उत्तर में खिचड़ी, दक्षिण में पोंगल, पंजाब में लोहड़ी, असम में बीहू भी कहते हैं। इस दिन तिल गुड़ के दान का विशेष महत्व बताया गया है। सूर्य नमस्कार कराते हुए कहा कि यह यौगिक व्यायामों में सर्वश्रेष्ठ है। यह सात आसनों को बारह के व्यवस्थित क्रम में किया जाता है। फेफड़ों के अंदर शुद्ध प्राण वायु का प्रचुर मात्रा में संचार होने के कारण शरीर सूर्य के समान कांतिवान बनता है। भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम विलोम, भ्रामरी प्राणायाम को बारीकियों से सिखाते हुए उनके लाभ एवं सावधानियों को बताया। शिविर में व्यवस्थित दिनचर्या का भी पाठ सिखा रहे हैं। शिविरार्थियो को योग के साथ-साथ स्वावलंबन, भारतीय संस्कृति, सदाचार एवं नैतिक शिक्षा भी प्रदान कर रहे हैं। योगविद् अर्जुन धनंजय सिन्हा प्रतिदिन भारतीय परम्परा अनुरूप वेशभूषा में साइकिल से दरी, माइक पकड़ कर शिविर स्थल पहुंचते हैं। शिविर के आयोजन में ऊर्जावान सरपंच संतुराम ध्रुव, प्रधान पाठक दीपक तिवारी तन-मन-धन से सहयोग कर योग से लाभान्वित हो रहे हैं। गांव के नूतन महाराज, जीवन, पुजेरीन दाई, हरि, साधना, पेखज़, कृतिका, रुचि, भोजराज, चेलेश्वरी, विद्या, मानसी, गोविंद प्रतिदिन योग की बारीकियां सीख रहे हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments