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बेटा-बेटी के अंतर को छोड़े और दोनो को समान अधिकार प्रदान करें-चंद्रकांत शर्मा

उतई ।स्वयं का ही अंश है संतान तो फिर बेटा या बेटी की मन मे कुभावना क्यों पाल रखे है इस कुभावना को मन से दूर करे बेटा और बेटी के अंतर को छोड़े और दोनो को समान अधिकार प्रदान करे तभी जीवन सुखमय हो सकता है जिस दिन बेटा बेटी का अंतर दूर होगा उसी दिन सचमुच राम राज्य की स्थापना हो जाएगी। आज इसी बुराई ने समाज मे भ्रूण हत्या के महापाप को जन्म दिया है जिसमे हम सभी भागीदारी निभा रहे है कन्या प्रकृति की अंशभुता है जिस घर मे नारियों का सम्मान हो वह घर स्वर्ग होता है जहाँ देवता आकर निवास करते है नारी पूज्यनीय है भ्रुण हत्या के महापाप को हम सभी को आगे आकर रोकना होगा तभी हमारी बिटिया समाज मे सर उठाकर चल सकेगी।
उक्त उद्बोधन ग्राम बोरीडीह की पावन धरा मे साहू परिवार के शुभसँकल्प से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस मे श्री राम चरित, श्री कृष्ण जन्म और बाल लीला सहित माखन चोरी की कथा पर सामाजिक उत्थान की प्रेरणा से ओतप्रोत करते हुए प्रवचनकर्ता मानस मर्मज्ञ स्वामी चंद्रकांत शर्मा ने कहा भ्रूण हत्या के महापाप को करने वाले और करवाने वाले दोनो ही कलिकाल के कंस है भागवत की कथा में प्रवृत्ति का चिंतन है द्वापर युग मे एक कंस था जो देवकी के छः पुत्रो का वध किया लेकिन कलिकाल के कंस गर्भ में ही बच्चो को मार रहे है।इस दौरान इंद्ररमन वेदनारायण साहू गुलाब साहू चेतन साहू अवध राम यतेंद्र लखेश्वरी निर्मला वीणा सीमा आरती नंदनी रेणु चंद्रकला उमाशंकर कमल किशोर ईश्वरी वेदप्रकाश छगन दुष्यंत साहू आदि थे।

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