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अखिल भारतीय आदिवासी हल्बा समाज बिंद्रानवागढ़ का कुल्हारीकोट में अर्धवार्षिक शक्ति दिवस सम्पन्न- गैंदसिंह की शहादत को किया याद हल्बा समाज ने दिखाई एकजुटता

हेमन्त तिवारी के कलम से

पांडुका . अखिल भारतीय आदिवासी हल्बा समाज बिंद्रानवागढ़ ने 26 दिसंबर सोमवार को शक्ति दिवस के पावन अवसर पर अर्धवार्षिक बैठक कुल्हारिकोट में संपन्न हुआ इस अवसर पर समाज की इष्टदेवी मां दंतेश्वरी छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद बस्तर के आदिवासी पारलकोट के जमीदार गैंदसिंह नायक की शहादत को नमन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जैतराम नाग अध्यक्ष, हल्बा समाज बिंद्रानवागढ़, पारस राम देव उपाध्यक्ष, पोखराज चिंडा सचिव, पुरूषोत्तम चन्द्रवंशी कोषाध्यक्ष, द्वारिका भेड़िया सह सचिव, बिन्द्रानवागढ़ कर्मचारी प्रकोष्ठ अंतर्गत लीलाम्बर सोम संरक्षक, रोहित कुमार बोर्झा अध्यक्ष, डायमंड नाग उपाध्यक्ष, मुन्ना लाल कश्यप सह उपाध्यक्ष, मिथलेश नाग सचिव, देवशरण बोर्झा सह सचिव, दीपक नाग सह सचिव, उत्तम सोम कोषाध्यक्ष, महेंद्र बोर्झा, योगेंद्र, के करकमलों से मां दंतेश्वरी की परंपरा अनुसार गुलाल पुष्प धूप दीप से पूजा अर्चना कर आदिवासी समाज बालिका ने सांस्कृतिक कार्यकम की प्रस्तुति शुभ स्वागतम, आदिवासी हल्बी हल्बा के गानों में नृत्यकर समाज को जोड़ने का प्रयास किया तत्पश्चात स्वागत समारोह मंच संचालन श्री चरण कश्यप द्वारा बड़े ही सम्मान के साथ बैठक में अलग अलग जगह से आए लगभग तीन हजार से अधिक की संख्या में मातृशक्ति, पितृशक्ति, कर्मचारी प्रकोष्ठ, के महिला कर्मचारी प्रकोष्ठ, युवक, युवती शक्ति, अन्य गड़ से आए सभी समस्त बिरादर भाई बहनों का गुलाल हार से स्वागत कर पेन, डायरी से सम्मान किया गया। इस कड़ी को आगे बड़ाते हुए हल्बा समाज बिंद्रानवागढ़ सचिव पोखरज चिंडा ने समाज के चार पांच बिरादर भाई बहनों को सामाजिक संगठन, विकास जैसे प्रमुख बातो पर संबोधन के लिए कहा जिसमे लीलांबर सोम सरपंच कोचबाय, कर्मचारी प्रकोष्ठ के सदस्य, केअलावा नारी शक्ति ने बड़ी ही बेबाकी से समाज को अपनी कुछ पांच छह बिंदु पर कुछ बाते कही जिसमे नशा नाश का कारण है जिसके गर्त में आज की युवा पीढ़ी चली जा रही है, शिक्षा के बिना अच्छे समाज की परिकल्पना नही की जा सकती, माता पिता अपने बच्चों को अच्छे संस्कारवान बनाए जिससे समाज को नई दिशा मिल सके, आज एक बच्चे को माता पिता जिस प्रकार जन्म देकर उसकी लालन पालन करती है खुद नही खाती लेकिन अपने बच्चो को भूखा नही रखती रात रातभर जागकर बच्चों को सुलाती दुलार करती मां जब बच्चा बड़ा हो जाता है तब वही बच्चा माता पिता को घर से निकाल बाहर करती है, समाज रूपी गंगा में सबको बोलना चाहिए डरने की जरूरत नहीं समाज में बैठे लोग हमारे अपने है जैसे शब्दों की बान से अपनी ओर लोगो को खिंचे रखा। शक्ति दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य सभी जगह सामाजिक ध्वजारोहण के साथ एकता को बनाए रखने का संकल्प भी लिया गया। समाज ने शहीद गैंद सिंह के शहादत व उनके योगदान को भी याद किया। 26 दिसंबर का दिन को हल्बा समाज सभी जगहों पर शक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है। शक्ति दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य हल्बा समाज को संगठन प्रदान करना है। कार्यक्रम का मुख्य उददेश्य समाज का एकीकरण करना होता है। कर्मचारी प्रकोष्ठ द्वारासमाज के युवक युवती को रोजगार के अवसर प्रदान करने मार्गदर्शन दिया गया साथ ही इस वर्ष 10वी व 12वी में उत्कृष्ट अंक प्राप्त किये 8 विद्यार्थियों एवं खेल के छेत्र में राष्ट्रीय स्तर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले समाज के प्रतिभावान ,समाज के गौरव बच्चों को सम्मानित कर उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। सामाजिक परंपरासमाज में नीति नियम रीति रिवाज कई परंपरा होती है उन अहम मुद्दों पर हलबा समाज ने चर्चा कर निराकरण किया। इस दौरान उपस्थित सदस्य गण – विनोद कश्यप, जागेश्वर कश्यप, टोकेश्वर बिसेन, श्यामलाल कश्यप, अनुज कश्यप, रूपेश कश्यप, गिरधर कश्यप, दिनेश कश्यप, कुलेश्वर राणा, तुकेश्वर कश्यप, रितेश बोरझा, साथ ही बिन्द्रानवागढ़ परिक्षेत्र के सभी सामाजिक युवा प्रकोष्ट, महिला प्रकोष्ठ एवम कर्मचारी प्रकोष्ट के सभी बिरादर उपस्थित हुए! उक्त बैठक की जानकारी कर्मचारी प्रकोष्ट के मीडिया प्रभारी मिश्रीलाल गढ़िया ने दी।

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