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मनुष्य को दुख में भी संयमित रहना चाहिए और भगवान पर विश्वास बनाए रखना चाहिए-तोरण महाराज

पाटन। सुख और दुख दोनों मित्र है। जीवन में दुख है, तभी सुख की अनुभूति है। मनुष्य के जीवन में कोई न कोई दुख अथवा अभाव जरूर होना चाहिए। जीवन में दुख होगा, तभी सुख का अनुभव होगा। दुख मनुष्य को सीधे ईश्वर से जोड़ता है। दुख होता है तभी, हम ईश्वर को याद करते हैं। जो भगवान को याद करता है, भगवान उन पर ध्यान जरूर देते हैं। जिन पर स्वयं भगवान का ध्यान हो, उनके जीवन में फिर अभाव नहीं टिक सकता और उसके बाद परमसुख निश्चित है।
कांकेर कुरना के पंडित तोरण महाराज ने पतोरा में सार्वजनिक श्री हनुमान मंदिर समिति द्वारा आयोजित भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह में कही। उन्होंने ध्रुव चरित्र कथा प्रसंग पर चर्चा करते हुए कहा कि समय सदैव एक जैसा नहीं रहता, दुख का समय भी हमेशा नहीं रहता, लेकिन दुख से बचा भी नहीं सकता। भगवान राम और कृष्ण का जीवन इसका उदाहरण है। भगवान को भी जीवन में भयंकर दुखों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि जिस तरह मनुष्य जीवन में दुख आना तय है, उसी तरह सुख भी निश्चित है। भगवान मनुष्य को जीवन में सुख के अवसर जरूर देते हैं। मनुष्य को दुख में भी संयमित रहना चाहिए और भगवान पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। दुख आ जाए तो भगवान से शिकायत नहीं करना चाहिए। भगवान जो करते हैं, सही करते हैं, ऐसा ध्यान कर जो हो रहा है वहीं सही है, यह स्वीकार करना चाहिए। इससे समय अनुकूल होने लगता है। संसार के सच्चे सुखों की व्याख्या करते हुए पंडित तोरण महाराज ने कहा कि माता-पिता के चरणों और उनकी सेवा से बड़ा संसार में कोई भी सुख नहीं है।


पिता दशरथ बने तो हर बच्चा राम होगा
पंडित तोरण महाराज ने बच्चों के चरित्र निर्माण पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों के संस्कार शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। पिता अगर दशरथ के आदर्शों को जीवन में आत्मसात कर ले, तो उसके पुत्र को राम बनने से कोई भी नहीं रोक सकता। पुत्र के सामने पिता जैसा व्यवहार करेगा, पुत्र उसी का अनुपालन करेगा और उसे ही पिता और संसार को लौटाएगा।
हाय-बाय कर रहा समाज को विकृत
पंडित तोरण महाराज ने युवाओं में बढ़ रही पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण को भारतीय संस्कृति और परंपराओं के लिए घातक करार देते हुए कहा कि अपनी संस्कृति को नही भूलना चाहिए। हाय-बाय की पश्चिमी संस्कृति समाज को लगातार विकृत कर रहा है, युवाओं को इससे बचना चाहिए। बच्चों को अपनी संस्कृति से परिचित कराना माता पिता का दायित्व है।
गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू हुए शामिल

भागवत कथा प्रवचन में गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू भी शामिल हुए और सत्संग का लाभ लिया। गृहमंत्री साहू ने हनुमान मंदिर पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख समृद्धि की प्रार्थना की। इसके बाद उन्होंने कथा श्रवण का लाभ लिया। गृहमंत्री भागवत जी की आरती में भी शामिल हुए।
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