Homeधर्म समाज संस्थाजीवन में मित्रता कृष्ण और सुदामा की तरह होनी चाहिए: श्रीकांत त्रिपाठी

जीवन में मित्रता कृष्ण और सुदामा की तरह होनी चाहिए: श्रीकांत त्रिपाठी


पाटन। ग्राम सेलूद में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में गुरुवार को भागवत सिंधु पंडित श्रीकांत त्रिपाठी व बाल विदुषी कु शीघ्रता त्रिपाठी ने सुदामा चरित्र का सुंदर प्रसंग सुनाया। कथा में आज बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडाल में मौजूद रहे। कथा सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि सुदामा ब्राह्मण भिक्षा मांग कर निर्धनता का समय गुजारते हुए परमपिता परमात्मा का भजन करते चले आ रहे थे। तभी सुदामा की पत्नी सुशीला ने उन्हें श्रीकृष्ण की मित्रता का स्मरण कराया। सुदामा ब्राह्मण ने अपनी पत्नी के द्वारा पड़ोसी से तीन मुट्ठी तंदुल मंगाए और तंदुल लेकर पैदल ही द्वारिकापुरी जा पहुंचे। सुदामा ब्राह्मण का आगमन सुनते ही भगवान कृष्ण नंगे पर दौड़ पड़े व अपने मित्र सुदामा को गले से लगा लिया। बाद में कृष्ण ने महल ले जाकर अपने अश्रुओं से मित्र सुदामा के पग धोए। श्रीकृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा ब्राह्मण की दीन-हीन दशा को देखकर उन्हें धन-धान्य और महल से परिपूर्ण कर दिया।

इस अवसर पर जवाहर वर्मा, सुभाष राय, सावित्रि राय, बल्लू राय, ममता राय, पुष्पा, प्रभा, सतीश साहू, बलराम यादव, सतीश राय, राजू राय,हेमंत कपूर, अजय राजपूत,किशन हिरवानी, राजेश साहू, शुशिला यादव, दिलेश्वरी साहू, अन्नपूर्णा वर्मा, मेनका निर्मलकर, सावित्री वर्मा, ललिता वर्मा, उमेश राय, अनुष्का राय, चिराग , प्रतीक, चीकू, काजू, सुनीता, दरबारी, संगीता, विनय, रोशनी, नारायण, सरला, सुरेश,राधा, संतोष, सुनीता, आशीष, अंजना, बबलू, शोभा, राजाराम, सुनीता, राममिलन, राधा, मोहन राय, चंदा बाई, राम बाई, तारा बाई, रविशंकर जायसवाल,राकेश राय, बाबू , सुशीला, गोपचंद, कल्लू, राजा, कांता , बद्री, सुषमा, गोविंद, लक्ष्मी, चंद्रभान, उषा, अमर नाथ सहित राय परिवार सहित बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।

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